Purnia University में छात्रों के लिए लगाया गया वाटर कूलिंग मशीन धूल फांक रहा, वि० प्रशासन की लापरवाही उजागर

पूर्णिया, किशन भारद्वाज : छात्रों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालयों में तमाम सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन Purnia University में इन सुविधाओं का हाल देख छात्रों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। पूर्णियां विश्वविद्यालय के अकादमिक इमारत में जहां से होकर कुलपति महोदय के कार्यालय तक जाया जाता है, उस सीढ़ी के नीचे लगे वाटर कूलिंग मशीन की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यह वाटर कूलिंग मशीन धूल और गंदगी से अटा पड़ा है और साफ तौर पर दिख रहा है कि लंबे समय से इसका उपयोग नहीं हुआ है।

स्पष्ट है कि वाटर कूलिंग मशीन के आसपास गंदगी फैली हुई है, पुराने टूटे फर्नीचर और खाली बोतलों के साथ कचरे का अंबार लगा है। दीवारों पर गुटखे की पिक के निशान, फर्श पर पानी जमा है जिससे फिसलने का खतरा भी बना हुआ है। यही नहीं, इस गंदगी से मच्छरों और अन्य कीटों के पनपने का खतरा भी बढ़ गया है, जो छात्रों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

  • प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

यह वाटर कूलिंग मशीन छात्रों के पेयजल की सुविधा के लिए लगाई गई थी, लेकिन अब यह खुद प्रशासन की लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। छात्रों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो मशीन की सफाई करवाई गई और न ही इसके रखरखाव की कोई व्यवस्था की गई।

  • छात्रों की मांग : जल्द हो समाधान

छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में शीघ्र संज्ञान ले और वाटर कूलिंग मशीन की मरम्मत तथा उसके आसपास की सफाई कराए। इसके अलावा, परिसर की नियमित सफाई और रखरखाव के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो। छात्रों की सुविधाओं की अनदेखी केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। यदि शिक्षा संस्थान ही मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में विफल रहेंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना अधूरा रह जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल कार्रवाई कर छात्रों की समस्याओं का समाधान करे।

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