Social Stress On Child: बच्चों पर सामाजिक तनाव का प्रभाव: अभिभावकों से अपील

मधेपुरा/पूर्णिया: Social Stress On Child आजकल के समाज में अभिभावकों की मानसिकता यह बन गई है कि बच्चों को उनके सपनों और इच्छाओं के बजाय समाज की अपेक्षाओं के हिसाब से चलने के लिए मजबूर किया जाए। यह देखा गया है कि कई बार माता-पिता अपने बच्चों को करियर चुनने के लिए एक निश्चित दिशा में चलने के लिए प्रेरित करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि एक विद्यार्थी को खुद अपने जीवन और करियर का चुनाव करने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

समाज और परिवार का दबाव बच्चों के आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकता है। हम यह भूल जाते हैं कि हर बच्चा अपनी विशेषताएं, सपने और आकांक्षाएं लेकर आता है। ऐसे में, किसी भी विद्यार्थी को उसकी इच्छाओं के खिलाफ दबाव डालकर उसके भविष्य को तय नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि समाज को यह समझने की जरूरत है कि अगर हम अपने बच्चों को खुला माहौल देंगे, तो वे सही दिशा में अपने कदम बढ़ा सकते हैं।

अभिभावकों से अनुरोध है कि बच्चों को उनकी इच्छाओं और मनोभावनाओं के खिलाफ न चलने दें। किसी भी विद्यार्थी के रास्ते में रुकावट डालने से उसकी असफलता का कारण आप ही बन सकते हैं। बच्चों को सपोर्ट कीजिए, न कि उन पर दबाव डालें।

— अतुलेश वर्मा (बाबुल जी), प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री डिग्री कॉलेज, बभनगामा, मधेपुरा

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