PURNIA NEWS : पूर्णिया के आर्ट गैलरी-सह-प्रेक्षा गृह में जब आकांक्षा हाट मेला का उद्घाटन होने जा रहा था, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां मौजूद सैकड़ों स्टॉल्स में एक स्टॉल ऐसा भी होगा, जो सबकी नज़रों और दिलों पर छा जाएगा। जैसे ही बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री माननीया लेशी सिंह ने फीता काटा और भीड़ के साथ मेले का भ्रमण शुरू किया, अचानक सबकी निगाहें एक ऐसे स्टॉल की ओर खिंचती चली गईं — जहाँ सिर्फ सामान नहीं, सृजनशीलता का संसार बसा हुआ था।
यह स्टॉल था — किलकारी बिहार बाल भवन, पूर्णिया का।
इस स्टॉल में लगे थे ऐसे-ऐसे मॉडल, चित्र, कलाकृतियाँ और वैज्ञानिक प्रयोग, जिन्हें देखकर खुद मंत्री लेशी सिंह भी कुछ देर तक ठिठक गईं। उनके साथ जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, उप विकास आयुक्त चंद्रिमा अत्री, वरीय पदाधिकारी और अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि भी बच्चों की प्रतिभा के इस विस्फोट को देखकर दंग रह गए। बच्चों द्वारा बनाए गए लिप्पन आर्ट, जूट से बने अनोखे खिलौने, ब्लैक पॉटरी, और कोकोनट शेल से तैयार की गई घरेलू वस्तुएं केवल सजावटी नहीं थीं, वे संभावनाओं की गवाही दे रही थीं। टेक्सटाइल कला, क्विलिंग आर्ट और सबसे ज़्यादा भीड़ खींचने वाला सेक्शन — फोटोग्राफी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित रोबोटिक प्रोजेक्ट।
और जब मंत्री जी ने खुद देखा कि छोटे-छोटे बच्चे कोडिंग समझा रहे हैं, और अपने लिखे हुए अखबार, कविताएं, बाल-पत्रिकाएं लोगों को पढ़वा रहे हैं — तब उन्होंने वही कहा, जो हर दर्शक के मन में चल रहा था यह सिर्फ मेला नहीं है, यह भविष्य की प्रयोगशाला है, और किलकारी इसमें बदलाव का केंद्र बन चुकी है। आश्चर्य की बात तो यह रही कि न सिर्फ लोग तारीफ कर रहे थे, बल्कि किलकारी के स्टॉल से कई उत्पादों की खरीदारी भी हो रही थी — फोटोग्राफ्स से लेकर हस्तशिल्प तक। कार्यक्रम में आए अन्य विभागों के स्टॉल्स — जैसे शिक्षा, जीविका, आपदा प्रबंधन आदि — भी शानदार थे, लेकिन किलकारी ने अपनी मौलिकता, रचनात्मकता और बच्चों की आत्मनिर्भर सोच के दम पर खुद को अलग साबित कर दिया।




