कुरसेला-बिहारीगंज रेलवे लाइन का सर्वे शुरू, इसको लेकर आमलोगों में है असमंजस

पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: लगभग 57 किलोमीटर लंबी कुरसेला-बिहारीगंज रेलवे लाइन को लेकर यहां के लोगों के सपनों के साथ-साथ , 1974 में पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के सपनों को भी पंख लगने की उम्मीद जगी है। इसका सर्वे एकबार फिर से किया जा रहा है। इसको लेकर ड्रोन से सर्वे के दौरान जगह-जगह सड़कों पर चिन्हांकन भी किया जा रहा है। यह बता दें पूर्व मंत्री ललित नारायण मिश्र का सपना था कि बिहारीगंज से कुरसेला को रेलवे लाइन से जोड दिया जाए, ताकि इस बाढ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके तथा इसका विकास हो सके। इसपर वे काफी आगे बढ भी गए थे, परंतु उनकी असामयिक मौत से यह ठंडे बस्ते में चला गया था। एकबार फिर से इस रेलवे लाइन का सर्वे शुरू हो गया है, इसे लेकर एकओर लोग आशान्वित हैं कि सपनों को पंख लगेंगे, वहीं लोग चिंतित भी हैं कि कहीं यह एकबार फिर से चुनावी जुमला ना साबित हो जाए।

पूर्व में देखा गया है कि इस रेलवे लाइन को लेकर राजनीतिज्ञ बस इसे जब-तब चुनाव में जीत का मोहरा बनाकर आगे बढा देते हैं, फिर चुनाव के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। इसबार भी क्या सिर्फ जुमला बनकर रह जाएगा, या फिर इसे धरातल भी उतारा जाएगा, अब लोगों के दिलों में इसको लेकर तरह-तरह की बातें उठने लगी हैं। इसका फिर से 12 सितंबर से इस रेलवे लाइन का सर्वे कुरसेला स्टेशन से होना शुरू हुआ है। इसबार का सर्वे का रूट, पूर्व के सर्वे के रूट से सीधा उल्टा है। वर्ष 2009 में हुए सर्वे में यह रेलवे लाइन टीकापट्टी के बीचो-बीच निकलते हुए तेलडीहा एवं शिशवा गांव के बीच से गुजरते हुए, रूपौली की ओर निकली थी तथा कई जगहों पर एसएच 65 को समपार की थी, परंतु इसबार इसका सर्वे ठीक इसके विपरीत है। इसबार यह टीकापट्टी के दक्षिणी एवं पश्चिमी बहियार से निकलते हुए तेलडीहा एवं धूसर, तेलडीहा एवं छर्रापटी, आझोकोपा एवं ग्वालपाडा के बीच से निकली है। इसमें कहीं पर भी एसएच 65 को इस लाइन ने टच नहीं किया है। यह बता दें कि लगभग 57 किलोमीटर लंबी कुरसेला-बिहारीगंज रेलवे लाइन के लिए केंद्र सरकार ने 170.8 कडोड रूपये आवंटित किया है, जिससे इस रेलवे लाइन के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है। कोलकाता की एक निजी कंपनी की टीम ने रेलवे के डिजाइनिंग और सर्वे का काम शुरू किया है।

टीम द्वारा डीपीआर से जूडे प्वाईंट मार्किंग का काम किया जा रहा है। इसके तहत सर्वे कार्य में जमीन पर चिन्हाकंन और ड्रोन की मदद से पूरे इलाके का एरियल सर्वे एवं एनालिसिस शामिल है। यह सर्वे 15 दिनों तक चलेगा। इसके बाद रेलवे मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी और अनुमोदन के बाद वास्तविक निर्माण कार्य श्द्याुरू होगा। इसके अलावा रेलवे के इस इलाके का डिजिटल नक्शा तैयार करना है, ताकि भविष्य में ट्रैक बिछाने के दौरान तकनीकि बाधाओं का समाधान पहले से ही तय हो सके। यह भी बता दें कि इस सर्वे को लेकर अब यहां के लोगों में थोडी-भी खुशियां व्याप्त नहीं है। यह लाइन वर्तमान में सबसे लंबी दूरी धूसर टीकापट्टी पंचायत क्षेत्र में होगी। इसको लेकर मुखिया शांति देवी का कहना है कि जिस प्रकार अब सडकों का जाल बिछा है, उस परिस्थिति में अब इस क्षेत्र को रेलवे की जरूरत नहीं महसूस की जा रही है। लोगों को अब बिना मतलब उनकी मंहगी जमीन इसके चलते चले जाने का डर सता रहा है। खासकर इस क्षेत्र में प्रायः लोग गरीब-मजदूर हैं, जिनके पास ज्यादा जमीन नहीं हैं, उनकी जिंदगी उसी के सहारे चल रही है। उन्होंने इसे स्थगित करने की मांग सरकार से की है । यद्यपि कुछ लोगों का मानना है कि यह रेलवे लाइन कोसी-सिमांचल क्षेत्र के लिए जीवन रेखा साबित होगी। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित होगी। स्थानीय लोगों को आवागमन और माल परिवहन के लिए सुविधा होगी। कुल मिलाकर अब तो समय ही बताएगा कि यह बिहार में होनेवाले चुनाव में जीत को केंद्रित करके सर्वे कराया जा रहा है, या फिर वास्तव में यहां से रेल के गुजरने की उम्मीद जग उठी है।

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