पूर्णिया, विमल किशोर: अमौर प्रखंड का इलाका एक बार फिर नदियों के प्रकोप से जूझ रहा है। कनकई, महानंदा, परमान और बकरा जैसी नदियां हर साल की तरह इस बार भी उफान पर हैं, जिससे दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। बरसात शुरू होते ही नदियों का रुख रिहायशी इलाकों की ओर हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहाल हो जाती है।कटाव और बाढ़ की दोहरी मार झेलते ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। खेत बर्बाद हैं, रोजगार के साधन नहीं, और अधिकांश लोग छह-छह महीने पलायन को मजबूर हैं। क्षेत्र में किसी भी उद्योग या वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में यह इलाका धीरे-धीरे आर्थिक रूप से पिछड़ता जा रहा है।समाजसेवी चुन्नी देवी ने सरकार से बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी समाधान निकालने और सीमलवारी, नगरा टोला, सूरजपुर जैसे प्रभावित गांवों में शीघ्र राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक अमौर का यह दर्द हर साल दोहराया जाएगा। Post navigationएनक्वास प्रमाणीकरण की दिशा में औराही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का बड़ा कदम, राज्यस्तरीय निरीक्षण में दिखा सुधार का संकल्प पूर्णिया विश्वविद्यालय में बाहरी अराजक तत्वों की घुसपैठ से फैला भय का माहौल, शिक्षक–कर्मचारी असुरक्षित महसूस कर रहे
पूर्णिया, विमल किशोर: अमौर प्रखंड का इलाका एक बार फिर नदियों के प्रकोप से जूझ रहा है। कनकई, महानंदा, परमान और बकरा जैसी नदियां हर साल की तरह इस बार भी उफान पर हैं, जिससे दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। बरसात शुरू होते ही नदियों का रुख रिहायशी इलाकों की ओर हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहाल हो जाती है।कटाव और बाढ़ की दोहरी मार झेलते ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। खेत बर्बाद हैं, रोजगार के साधन नहीं, और अधिकांश लोग छह-छह महीने पलायन को मजबूर हैं। क्षेत्र में किसी भी उद्योग या वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में यह इलाका धीरे-धीरे आर्थिक रूप से पिछड़ता जा रहा है।समाजसेवी चुन्नी देवी ने सरकार से बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी समाधान निकालने और सीमलवारी, नगरा टोला, सूरजपुर जैसे प्रभावित गांवों में शीघ्र राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक अमौर का यह दर्द हर साल दोहराया जाएगा।