पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: Purnia News आजादी के 77 साल बाद भी कांप घाट पर पुल नहीं बन पाया है, आज भी इस इक्कीसवीं सदी में भी ग्रामीणों का सहारा चचरी ही बना हुआ है। जब भी चुनाव आता है, एमपी-एमएलए, जनप्रतिनिधि वादा करते तो हैं, परंतु जीतने के साथ ही आजजनता को उनके हाल पर छोड देते हैं। यह बता दें कि कांपघाट तीन थानों को जोडता है। इस होकर टीकापट्टी, मोहनपुर एवं रूपौली थाना के लोग आर-पार होते हैं। बरसात के दिनों में जून से लेकर नवंबर तक चचरी भी टूट जाती है तथा यातायात बंद हो जाती है, तब लोग काफी दूरी तय करके अपने गनतब्य स्थान तक पहुँचते हैं।
इसके दोनों ओर पक्की सडकें बनी हुई हैं, बस पुल का बनना बाकी है। इस घाट से प्रखंड का भौवा प्रबल, नाथपुर, मोहनपुर, लालगंज, कांप, लक्ष्मीपुर छर्रापटी, श्रीमाता, धूसर टीकापटी, डोभा मिलिक सहित अनेक पंचायत के लोगों का सीधा आवागमन होता है। इस घाट के दोनों ओर किसानों की जमीनें हैं, जिसे तैयार करने या फिर फसल लगाने को लेकर आना-जाना लगा रहता है। खासकर किसानों को काफी परेशानी झेलनी पडती है। इसको लेकर यहां के लोगों ने कईबार नेताओं से गुहार लगायी, परंतु सभी वादाखिलाफी करते रहे।
अगर यह पुल बन जाता है तो ना सिफ मुख्यालय की दूरी कम होगी, बल्कि चौतरफा विकास का रास्ता भी खुल जाएगा। मौके पर प्रमुख प्रतिमा देवी, मुखिया सुलोचना देवी, मुखिया पंकज यादव, मुखिया पवनी देवी, पूर्व मुखिया गौरी शर्मा, पूर्व उपप्रमुख अजय शर्मा आदि ने बताया कि कांपघाट का दूर्भाग्य है कि आजतक कभी भी किसी ने उलटकर नहीं देखा है। सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है। उन्होंने सरकार से इस घाट पर पुल बनवाने की मांग की है। देखें सरकार इसओर ध्यान देती भी है या नहीं।



