पूर्णिया, किशन : पूर्णिया विश्वविद्यालय ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल करते हुए Mental Health एवं Well-Being कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही पूर्णिया विश्वविद्यालय बिहार का पहला विश्वविद्यालय बन गया है, जिसने छात्रों, शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई है, जिसके अनुसार डॉ. पल्लव कुमार को पूर्णिया विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव (एडमिन-2) के पद के साथ-साथ Mental Health and Well-Being के नोडल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है। यह पहल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं इसके अधीन सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत तनाव, अवसाद, नशे की लत, आत्महत्या की प्रवृत्ति, परीक्षा एवं अकादमिक दबाव, कुंठा, उदासी, इंटरनेट की लत तथा सामाजिक अलगाव जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी महाविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने संस्थानों में काउंसलिंग एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि समय रहते विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके। इस पहल से न केवल विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ जीवन में आने वाली मानसिक चुनौतियों से उबरने में सहायता मिलेगी, बल्कि शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मियों को भी कार्यस्थल से जुड़े तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम शिक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन को भी मजबूत करेगा, जिससे एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण का निर्माण होगा। पूर्णिया विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल छात्रहित में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगी।



