पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: रुपौली में एपवा और भाकपा माले एरिया कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में भारत की पहली महिला शिक्षिका और जातिवाद विरोधी समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का नेतृत्व कामरेड सुलेखा देवी, संगीता देवी और सीता देवी ने किया, जबकि भाकपा माले जिला कमेटी सदस्य सही खेग्रामस और जिला सचिव चतुरी पासवान भी उपस्थित रहे।
आयोजन की शुरुआत दो मिनट के मौन के साथ हुई, जिसके बाद सावित्रीबाई फुले के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने स्त्री शिक्षा, जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जिस साहस और संघर्ष के साथ काम किया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्थिति में कुछ बदलाव जरूर आए हैं, लेकिन बराबरी और सम्मान की लड़ाई अभी अधूरी है।
सावित्रीबाई फुले का जीवन आज की महिलाओं को संघर्ष और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वक्ताओं ने उनके शैक्षणिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि 1848 में बालिका शिक्षा की नींव रखने वाली सावित्रीबाई फुले भारतीय समाज के लिए एक अमिट प्रेरणा हैं।



