अररिया, प्रिंस कुमार: Araria News किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से पहुंचाने के लिए फारबिसगंज प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘फार्मर आईडी कार्ड’ बनाने का महाअभियान शुरू हो गया है। मंगलवार से शुरू हुई यह मुहिम बुधवार को भी जोरों पर रही, जिसके तहत प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में विशेष शिविर लगाकर किसानों का डिजिटल डेटा एकत्र किया जा रहा है।
इन पंचायतों में आयोजित किए गए विशेष शिविर
कृषि और राजस्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रखंड की कई पंचायतों में शिविरों का आयोजन किया जा रहा है: रहिकपुर ठीलामोहन, हलहलिया, किरकिचिया, ठोलबज्जा, सैफगंज, अम्हारा और खैरखां। हलहलिया पंचायत के रमैय, भागकोहलिया, मानिकपुर, बारा और बोकड़ा जैसे गांवों में भी कैंप लगाकर किसानों का पंजीकरण किया गया।
क्या है ‘फार्मर आईडी’ और कैसे करेगी काम?
शिविर में उपस्थित कृषि समन्वयक प्रियंका कुमारी और राजस्व कर्मचारी अनिश कुमार ने किसानों को इस नई तकनीक की महत्ता समझाई:
डिजिटल पहचान: यह 11 अंकों की एक यूनिक पहचान संख्या होगी, जो आधार कार्ड से लिंक रहेगी।
दस्तावेजों से मुक्ति: एक बार फार्मर आईडी बन जाने के बाद किसानों को किसी भी योजना के लिए बार-बार कागजात (दस्तावेज) जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह आईडी बिल्कुल एटीएम कार्ड की तरह काम करेगी, जिससे खाद, बीज, सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ सीधे किसानों तक बिना किसी बिचौलिए के पहुंच सकेंगे।
पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज
फार्मर आईडी के लिए राज्य सरकार द्वारा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को निम्नलिखित जानकारी साझा करनी होगी: आधार कार्ड, खतौनी (जमीन के कागजात), बैंक अकाउंट की जानकारी, सक्रिय मोबाइल नंबर
9 जनवरी तक चलेगा विशेष अभियान
प्रखंड प्रशासन द्वारा जानकारी दी गई कि फार्मर आईडी बनाने का यह विशेष कैम्प 6 जनवरी से 9 जनवरी तक संचालित रहेगा। किसान सलाहकार मुरली मनोहर और सुप्रिया कुमारी ने अपील की है कि अधिक से अधिक किसान इन शिविरों में पहुंचकर अपना पंजीकरण कराएं ताकि भविष्य में उन्हें खेती से जुड़ी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
इस मौके पर कृषि समन्वयक प्रियंका कुमारी, राजस्व कर्मचारी अनिश कुमार, मनीष कुमार, किसान सलाहकार मुरली मनोहर, गायत्री देवी, भगवान चरण समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान उपस्थित थे।



