अंग इंडिया संवाददाता/
कड़ाके की ठंड के बीच जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नोबा जीएसआर (नेतरहाट ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन – ग्लोबल सोशल रिस्पॉन्स) द्वारा बुधवार की रात पूर्णिया में शीत राहत वितरण सेवा का आयोजन किया गया। इस सेवा अभियान के अंतर्गत शहर के विभिन्न स्थानों पर इलाज या रोटी की तलाश में जीवन यापन कर रहे असहाय एवं बेघर लोगों के बीच कुल 120 कंबलों का वितरण किया गया।
नोबा जीएसआर एक वैश्विक स्तर पर सामाजिक कार्य करने वाली संस्था है, जो दिल्ली, पटना, बेगूसराय, गोपालगंज एवं पूर्णिया सहित कई शहरों में जरूरतमंदों की पहचान कर सेवा कार्य कर रही है। संस्था सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया, कटिहार एवं अररिया जिलों में पहले से ही संगिनी कार्यक्रम के तहत स्कूली छात्राओं के मासिक धर्म स्वच्छता क्षेत्र में कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत 350 से अधिक स्कूलों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन एवं उच्च गुणवत्ता के पैड उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
पूर्णिया में आयोजित इस शीत राहत सेवा में नेतरहाट के पूर्ववर्ती छात्र एवं उनके परिजनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल एवं ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स के सहयोग से यह सेवा अभियान देर रात तक चलता रहा।
इस अवसर पर पूर्णिया जीएमसीएच, खुश्कीबाग ओवरब्रिज, पूर्णिया स्टेशन, पूर्णिया कोर्ट एवं पूर्णिया बस स्टैंड जैसे स्थानों पर फुटपाथ एवं खुले में सोने वाले जरूरतमंद लोगों के बीच कंबलों का वितरण किया गया। ठंडी रात में जब अभाव और मजबूरी साफ झलक रही थी, तब स्वयंसेवकों की टीम ने सेवा भाव से आगे बढ़कर लोगों को राहत पहुंचाई।
इस सेवा अभियान में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे —
श्री मनोज कुमार, जेल अधीक्षक, पूर्णिया
श्री राजेश चंद्र मिश्रा, उपाध्यक्ष, नोबा जीएसआर एवं सचिव, विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल
श्री ब्रजेश चंद्र मिश्रा, ट्रस्टी, विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल एवं निदेशक, ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स
श्री निखिल रंजन, प्राचार्य, विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल
श्री अशुतोष चंद्र मिश्रा, ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स
श्री राहुल शांडिल्य, जनसंपर्क अधिकारी, विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल
साथ ही इस सेवा कार्य में अमित लाकड़ा, सदाब अकरम, अभिषेक चौधरी, प्रज्ज्वल चौधरी, निहाल, कुंदन, नितीश, राजकुमार सहित वीवीजीआई स्टाफ एवं ब्रजेश ऑटोमोबाइल्स की पूरी टीम ने सक्रिय सहयोग दिया।
नोबा जीएसआर एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पूर्णिया में इस प्रकार के सेवा कार्य लगातार किए जाते रहे हैं और आगे भी समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक राहत पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।



