11 साल बाद जिंदा लौटी ‘मृत घोषित’ महिला, दहेज हत्या के केस में नामजद थे पति और ससुराल वाले

अंग इंडिया संवाददाता/मुजफ्फरपुर/
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से रिश्तों की तल्खी, गलतफहमी और कानून के जाल में उलझे एक परिवार की चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। दहेज हत्या के आरोप में जिस पत्नी को मृत मानकर पति और उसके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, वही महिला 11 साल बाद जिंदा अपने नए पति के साथ गांव लौट आई। महिला के अचानक सामने आने से इलाके में खलबली मच गई, वहीं वर्षों से फरार बताए जा रहे पति और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है।

मामला मीनापुर थाना क्षेत्र के मदारीपुर कर्ण गांव से जुड़ा है। यहां के निवासी वकील पासवान ने वर्ष 2015 में अपनी पुत्री सुनीता की दहेज के लिए हत्या कर शव गायब करने का आरोप लगाते हुए दामाद ललन पासवान समेत उसके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आरोप के बाद से ही ललन पासवान और उसके परिजन कानूनी कार्रवाई से बचते फिर रहे थे।

गुरुवार को उस समय सब हैरान रह गए जब सुनीता स्वयं मीनापुर थाने पहुंच गई। कोर्ट में उसका बयान दर्ज कराया गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे उसके पिता के घर पहुंचा दिया। सुनीता ने पुलिस को बताया कि पति से अनबन के बाद वह दिल्ली चली गई थी, जहां उसने दूसरे युवक से शादी कर ली और वहीं रह रही थी।

थानाध्यक्ष रामएकबाल प्रसाद ने बताया कि महिला का विस्तृत बयान न्यायालय में दर्ज कराया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। जानकारी के अनुसार, सुनीता की शादी वर्ष 2012 में तुर्की खरारू निवासी विलास पासवान के पुत्र ललन पासवान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के करीब तीन साल बाद सुनीता अचानक ससुराल से लापता हो गई थी।

बेटी के गायब होने के बाद पिता वकील पासवान ने ससुराल पक्ष पर हत्या कर शव गायब करने का गंभीर आरोप लगाया था। वहीं, सच्चाई यह थी कि सुनीता दिल्ली में रहकर नया जीवन शुरू कर चुकी थी। 11 साल बाद उसके सामने आने से न केवल पूरा मामला पलट गया, बल्कि दहेज हत्या जैसे संगीन आरोपों में फंसे लोगों की किस्मत भी बदलती नजर आ रही है। पुलिस अब पूरे मामले की कानूनी समीक्षा में जुट गई है।

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