पूर्णियाँ / किशन : सीमांचल की ऐतिहासिक शिक्षण संस्था पूर्णिया कॉलेज का 78वाँ स्थापना दिवस गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ हुई। समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) सावित्री सिंह ने की। इसमें शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्राचार्या प्रो. (डॉ.) सावित्री सिंह ने कहा कि 23 जुलाई 1948 पूर्णियाँ कॉलेज के इतिहास का स्वर्णिम दिवस है।

उन्होंने महाविद्यालय की स्थापना और विकास में योगदान देने वाले सभी महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी प्रयासों से यह संस्थान आज सीमांचल में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।उन्होंने राय बहादुर दुर्गा प्रसन्न घोष, राय बहादुर रघुबंश प्रसाद सिंह, उपेन्द्र नारायण चौधरी, अनूपलाल मेहता, तत्कालीन जिलाधिकारी शिव प्रसाद सिंह, हाजी जियाउर रहमान, सेठ रौतमल, राम नारायण मंडल, कुमार विमलानन्द सिंह, डॉ. लक्ष्मी नारायण ‘सुधांशु’ तथा पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री सहित अनेक विभूतियों के योगदान का स्मरण किया।प्राचार्या ने महाविद्यालय के ऐतिहासिक प्रशासनिक भवन और उसकी स्थापत्य विरासत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1951 में पटना विश्वविद्यालय ने इसे डिग्री कॉलेज का दर्जा दिया। इसके बाद यह बिहार विश्वविद्यालय, भागलपुर विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय और वर्तमान में पूर्णिया विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई के रूप में निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहा है।उन्होंने कहा कि पूर्णिया कॉलेज ने समाज को अनेक विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद, प्रशासक एवं जनप्रतिनिधि दिए हैं।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ और महाकवि डॉ. जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने महाविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा को रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने महाविद्यालय की गरिमा, उत्कृष्टता और परंपरा को बनाए रखने तथा शिक्षा, सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति समर्पित रहने का सामूहिक संकल्प लिया।समारोह को संबोधित करते हुए पूर्णिया विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) इस्तियाक अहमद ने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और पामर हाउस की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया।
संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. सविता ओझा, वाणिज्य विभागाध्यक्ष सीए डॉ. राजेश एस. झा, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकिता विश्वकर्मा, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मुजाहिद हुसैन, राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. मनीष, भौतिकी विभाग की डॉ. अंजना झा तथा इतिहास विभाग के डॉ. के.बी. गर्ग ने भी अपने विचार व्यक्त किए और महाविद्यालय की उपलब्धियों तथा समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. साजिदा अंजुम ने किया, जबकि परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमन गुंजन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।