नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं पर अहम टिप्पणियां कीं।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने यूजीसी एक्ट की धारा 3(सी) को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह केवल इस धारणा पर आधारित है कि सामान्य वर्ग के छात्र भेदभाव करते हैं, जिससे समानता के संवैधानिक सिद्धांत को ठेस पहुंचती है और समाज में वैमनस्य बढ़ने की आशंका है।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत केवल प्रावधानों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की ही जांच कर रही है, साथ ही यह भी टिप्पणी की कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी देश जातिगत जटिलताओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सका है। वहीं जस्टिस बागची ने अमेरिका के अतीत का संदर्भ देते हुए उम्मीद जताई कि भारत कभी उस स्थिति तक नहीं पहुंचेगा, जहां नस्लीय आधार पर अलग-अलग स्कूलों की व्यवस्था थी।



