नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई के दौरान कॉलेज कैंपस में जातिगत और क्षेत्रीय भेदभाव बढ़ने पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पूछा कि क्या आजादी के 75 साल बाद हम समाज में पिछड़े वर्ग और अंतर-जातीय दूरी को बढ़ते देख रहे हैं, जबकि लक्ष्य था समानता का समाज।
कोर्ट ने रैगिंग के मुद्दे पर भी सख्त टिप्पणी की और कहा कि किसी छात्र के खान-पान या संस्कृति का मजाक उड़ाना कतई स्वीकार्य नहीं है। सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया गया कि यूजीसी नियमों पर रोक के बाद क्या SC/ST और पिछड़े वर्ग के छात्र शिकायत कर पाएंगे, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के शिकायत करने के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती और समानता सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया है।



