नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को अपना नौवां पूर्णकालिक केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं और इस बार यह बजट रविवार को आएगा, जिससे पहले ही खास माना जा रहा है। बजट 2026-27 को लेकर मिडिल क्लास, सैलरीड वर्ग, निवेशक, होम बायर्स और हेल्थ सेक्टर से जुड़े लोगों की निगाहें सरकार पर टिकी हैं, क्योंकि महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच टैक्स राहत की उम्मीदें चरम पर हैं। मिडिल क्लास की सबसे बड़ी मांग इनकम टैक्स में कटौती और स्लैब को सरल बनाने को लेकर है।
खासतौर पर होम लोन पर ब्याज के लिए आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के तहत मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट को बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है, क्योंकि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और महंगे लोन के दौर में यह सीमा अब अपर्याप्त मानी जा रही है। टैक्स और निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, टैक्स सेविंग विकल्पों को आकर्षक बनाने और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुछ राहतभरे ऐलान कर सकती है।
हेल्थ सेक्टर को लेकर भी बजट से काफी उम्मीदें हैं। बजाज ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को और विस्तृत कर सकती है, जिससे ज्यादा लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस के तहत कवर किया जा सके और लंबी अवधि के इलाज को सस्ता बनाया जा सके, हालांकि इससे निजी अस्पतालों के मुनाफे पर दबाव भी बढ़ सकता है।
वहीं निवेशकों के नजरिये से देखें तो आनंद राठी जैसी ब्रोकिंग फर्मों का आकलन है कि सरकार बड़े चौंकाने वाले फैसलों से बचते हुए मौजूदा सुधारों की राह पर आगे बढ़ेगी और पूंजीगत खर्च को करीब 13 प्रतिशत बढ़ाकर 12.6 ट्रिलियन रुपये तक ले जा सकती है। कुल मिलाकर बजट 2026 से मिडिल क्लास को टैक्स राहत, निवेशकों को स्थिर नीतियां और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले फैसलों की उम्मीद है, अब देखना यह है कि सरकार इन उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है।



