कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है और इसके लिए एक हाई-टेक वॉर रूम व ‘क्रैक टीम’ के जरिए सुनियोजित रणनीति तैयार की गई है। बीजेपी का फोकस इस बार केवल सरकार विरोधी माहौल पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती, बूथ स्तर तक पकड़ और एक नए राजनीतिक नैरेटिव पर है, जिसका केंद्र पीएम नरेंद्र मोदी का “महा जंगल राज से विकसित बंगाल” का संदेश होगा।
पार्टी हिंदू वोटों के एकीकरण, मतुआ समुदाय को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जोड़ने और आरएसएस-बीजेपी तालमेल को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। 2021 के चुनाव में जहां बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं और वोट प्रतिशत में टीएमसी से करीब 10 फीसदी पीछे रही थी, वहीं पार्टी इसे ऐतिहासिक बढ़त की नींव मान रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जनवरी के अंत में प्रस्तावित बंगाल दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, जिसका मकसद पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म कर एकजुट नेतृत्व खड़ा करना है।
दिलीप घोष और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को सामूहिक नेतृत्व के रूप में आगे लाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि पार्टी नेतृत्व मानता है कि अंदरूनी मतभेद टीएमसी के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं। बीजेपी का आकलन है कि यदि संगठनात्मक एकता, मजबूत नैरेटिव और जमीनी नेटवर्क को एक साथ साध लिया गया, तो 2026 का चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।



