नागरिकता मिली तो छत क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से तीखा सवाल, 4 हफ्ते में जवाब तलब

नई दिल्ली: दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने के बावजूद आवास सुविधा नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त सवाल किया है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब सरकार ने इन लोगों को भारतीय नागरिक मान लिया है, तो फिर उन्हें रहने के लिए घर क्यों नहीं दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा है, जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मजनू का टीला क्षेत्र में रह रहे करीब 250 परिवार पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी हैं, जो अधिकांशतः अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। अदालत ने कहा कि इन नागरिकों के लिए आवास की व्यवस्था को लेकर सरकार को उच्च स्तर पर चर्चा कर समाधान निकालना चाहिए। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिकारियों ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक इन शरणार्थी परिवारों को मजनू का टीला इलाके से हटाने पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी। गौरतलब है कि इससे पहले 29 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इन परिवारों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और डीडीए को नोटिस जारी किया था।

इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। 30 मई 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने शरणार्थियों की याचिका खारिज करते हुए उन्हें हटाने की अनुमति दे दी थी, जिसके खिलाफ शरणार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शरणार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया।

अब सुप्रीम कोर्ट का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जब केंद्र सरकार इन लोगों को वैध भारतीय नागरिक मान चुकी है, तो उन्हें बुनियादी सुविधाएं, विशेषकर स्थायी आवास, क्यों नहीं उपलब्ध कराए गए। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मसले को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए ठोस समाधान पेश करे।

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