पूर्णियाँ / किशन : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त 16 निम्नवर्गीय लिपिकों को करीब दो साल बाद भी वेतन नहीं मिला है। 19 जनवरी 2024 की अधिसूचना के अनुसार सभी की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना की गई थी। कर्मियों ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर वेतन भुगतान जल्द शुरू कराने की मांग की है।पूर्णियाँ। पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त 16 कर्मियों को नियुक्ति के करीब दो वर्ष बाद भी वेतन भुगतान शुरू होने का इंतजार है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने और सेवा में योगदान देने के बावजूद वेतन नहीं मिलने से संबंधित कर्मियों के सामने आर्थिक कठिनाइयों की स्थिति बनी हुई है। कर्मियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से मामले में आवश्यक पहल करते हुए वेतन भुगतान शुरू कराने की मांग की है, ताकि वे अपनी सेवा के साथ-साथ परिवार का भरण-पोषण भी कर सकें।विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय से 19 जनवरी 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इन कर्मियों की नियुक्ति विश्वविद्यालय की अनुकंपा समिति की अनुशंसा तथा 13वीं अभिषद की बैठक दिनांक 18 दिसंबर 2023 की कार्यवाही संख्या-03 में लिए गए निर्णय के आधार पर की गई थी।
अधिसूचना में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को विश्वविद्यालय के क्षेत्राधीन अंगीभूत महाविद्यालयों में निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) के पद पर नियुक्त किए जाने का उल्लेख है।16 कर्मियों की हुई थी नियुक्तिअधिसूचना में कुल 16 अभ्यर्थियों के नाम, पदनाम, वेतनमान और पदस्थापन महाविद्यालय का विवरण दर्ज है। सभी को निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर नियुक्त किया गया है तथा उनके लिए वेतन स्तर-02 (₹19,900–63,200) का उल्लेख है। नियुक्त कर्मियों का पदस्थापन पूर्णियाँ, अररिया और कटिहार जिले के विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में किया गया है। इनमें एम.एल. आर्य कॉलेज कसबा, डी.एस. कॉलेज कटिहार, फारबिसगंज कॉलेज, अररिया कॉलेज, पूर्णियाँ कॉलेज, आर.एल. कॉलेज माधवनगर, पूर्णियाँ महिला महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालय शामिल हैं।
अधिसूचना में वेतन भुगतान को लेकर क्या है प्रावधान?
नियुक्ति संबंधी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मूल वेतन एवं भत्ता का भुगतान राज्य सरकार से राशि उपलब्ध होने पर किया जाएगा। योगदान के लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नहीं होने की बात भी अधिसूचना में कही गई है। अब यही प्रावधान संबंधित कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों को यदि अभी तक वेतन नहीं मिल पाया है, तो उनके सामने रोजमर्रा की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती भी बनी हुई है।‘नियुक्ति हुई तो वेतन का रास्ता भी साफ हो’संबंधित कर्मियों की मांग है कि उनकी नियुक्ति से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाओं की विश्वविद्यालय स्तर पर समीक्षा कर राज्य सरकार से राशि उपलब्ध कराने तथा वेतन भुगतान शुरू कराने के लिए प्रभावी पहल की जाए।कर्मियों का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है। ऐसे में नियुक्ति के बाद लंबे समय तक वेतन लंबित रहने से इस उद्देश्य पर भी असर पड़ता है। वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित विभाग और सरकार के स्तर पर आवश्यक पत्राचार एवं कार्रवाई करते हुए वेतन भुगतान का रास्ता जल्द साफ करे।
विश्वविद्यालय और सरकार से त्वरित पहल की उम्मीद
अधिसूचना की प्रतिलिपि संबंधित अभ्यर्थियों, महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रभारी प्रधानाचार्य, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा निदेशक, राज्यपाल सचिवालय सहित विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने का उल्लेख है। ऐसे में अब करीब दो वर्षों से वेतन की प्रतीक्षा कर रहे इन 16 कर्मियों की उम्मीद विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार की पहल पर टिकी है। यदि आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रिया पूरी कर वेतन भुगतान शुरू कराया जाता है, तो इससे कर्मियों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे बिना वित्तीय चिंता के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। मांग यही है कि नियुक्ति के बाद सेवा ले रहे इन कर्मियों के वेतन भुगतान के मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए और लंबित प्रक्रिया को जल्द पूरा कर उन्हें उनका नियमित पारिश्रमिक उपलब्ध कराया जाए।