पूर्णिया: PURNIA NEWS जीएमसीएच में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों और आईसीडीएस सीडीपीओ ने कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों को बताया गया कि एनआरसी में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए 20 बेड की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें बच्चों और उनके परिजनों के रहने और खाने की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।रसोई में पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था के अलावा, बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौने भी उपलब्ध होते हैं। सिविल सर्जन डॉ. आर. पी. मंडल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी भेजें और उपचार सुनिश्चित करें। डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि समय पर इलाज से कुपोषण के कारण होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं से अपील की कि वे बच्चों की सही पहचान करें और उन्हें उचित इलाज के लिए एनआरसी भेजें।साथ ही, शिशु स्वास्थ्य विभाग के डॉ. प्रेम प्रकाश ने कुपोषण से बचाव के लिए नवजात बच्चों की निगरानी और समय पर इलाज की आवश्यकता पर बल दिया। Post navigationVulger Bhojpuri Song Ban: अश्लील भोजपुरी गानों पर लगेगी लगाम.. होगी सख्त कार्रवाई PURNIA NEWS: ऑनलाइन गेम का शिकार… 14 वर्षीय छात्र रहस्यमय ढंग से लापता
पूर्णिया: PURNIA NEWS जीएमसीएच में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों और आईसीडीएस सीडीपीओ ने कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों को बताया गया कि एनआरसी में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए 20 बेड की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें बच्चों और उनके परिजनों के रहने और खाने की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।रसोई में पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था के अलावा, बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौने भी उपलब्ध होते हैं। सिविल सर्जन डॉ. आर. पी. मंडल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी भेजें और उपचार सुनिश्चित करें। डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि समय पर इलाज से कुपोषण के कारण होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं से अपील की कि वे बच्चों की सही पहचान करें और उन्हें उचित इलाज के लिए एनआरसी भेजें।साथ ही, शिशु स्वास्थ्य विभाग के डॉ. प्रेम प्रकाश ने कुपोषण से बचाव के लिए नवजात बच्चों की निगरानी और समय पर इलाज की आवश्यकता पर बल दिया।