The growing dominance of AI: कोडिंग नौकरियों पर संकट, भारत को चाहिए नई रणनीति

NEW DELHI : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता उपयोग भारत के कोडिंग और प्रोग्रामिंग सेक्टर के लिए चुनौती बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल्स जैसे चैटजीपीटी और कोपायलट कोड लिखने में इतने सक्षम हो गए हैं कि आने वाले सालों में लाखों आईटी नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। भारत, जो दुनिया का आईटी हब माना जाता है, को इस बदलाव से निपटने के लिए नई रणनीति बनानी होगी।

कोडिंग जॉब्स पर खतरा

एनालिटिक्स इंडिया मैगज़ीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 50 लाख से ज़्यादा सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर्स में से जूनियर और मिड-लेवल कोडर्स सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं। स्टैबिलिटी एआई के सीईओ एमाद मुस्ताक ने पिछले साल चेतावनी दी थी कि एआई भारत के आउटसोर्सिंग मॉडल को हिला सकता है। टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियाँ पहले ही जेनरेटिव एआई में निवेश कर रही हैं, जिससे पारंपरिक कोडिंग नौकरियों की माँग घटने की आशंका है। एक विशेषज्ञ ने कहा, “एआई से टेस्टिंग और बेसिक कोडिंग ऑटोमेट हो रही है। अब कम लोग ज़्यादा काम कर सकते हैं।”

नौकरी जाने का डर

मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि 2030 तक भारत में ऑटोमेशन से आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 60 लाख नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का दावा है कि एआई 2025 तक 20 लाख नई नौकरियाँ भी पैदा कर सकता है। फिर भी, मौजूदा स्किल्स वाले कोडर्स के लिए यह बदलाव मुश्किल भरा हो सकता है। पुणे के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर राकेश वर्मा ने कहा, “हमारी नौकरी अब पहले जितनी सुरक्षित नहीं। एआई से मुकाबला करने के लिए हमें नया सीखना होगा।”

नई रणनीति की ज़रूरत

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर री-स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने होंगे। स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रोग्राम जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की ट्रेनिंग को बढ़ावा देना होगा। पूर्व एचसीएल सीईओ विनीत नायर ने कहा, “पुराने कर्मचारियों को छोड़कर नए सस्ते ग्रैजुएट्स लेना अनैतिक होगा। मौजूदा वर्कफोर्स को अपस्किल करना ही रास्ता है।”

उम्मीद की किरण

जहाँ एआई कुछ नौकरियाँ छीन रहा है, वहीं यह डेटा साइंटिस्ट, एआई स्पेशलिस्ट और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों में मौके भी ला रहा है। सरकार और कंपनियों को मिलकर ऐसी नीतियाँ बनानी होंगी जो इस बदलाव को संतुलित करें। क्या भारत इस एआई क्रांति का फायदा उठा पाएगा, या यह नौकरियों का संकट बनेगा? जवाब रणनीति पर निर्भर है।

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