NEW DELHI : अमेरिका में खतरे में लाखों भारतीय छात्रों का वीजा: सोशल मीडिया पर गलती पड़ रही भारी

NEW DELHI : अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लाखों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चिंता सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने वीजा नियमों को सख्त करते हुए सोशल मीडिया गतिविधियों को आधार बनाकर छात्रों के F-1 वीजा रद्द करने की कार्रवाई शुरू की है। खबरों के मुताबिक, अगर कोई छात्र सोशल मीडिया पर हमास, हिजबुल्लाह या फिलिस्तीन समर्थक पोस्ट करता है, लाइक करता है या शेयर करता है, तो उसका वीजा खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा, इजरायल, यहूदी समुदाय या अमेरिकी नीतियों की आलोचना करने वाली सामग्री भी वीजा रद्द होने का कारण बन रही है।

अमेरिकी विदेश विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस नीति को तत्काल प्रभाव से लागू किया है। इसका असर न केवल मौजूदा छात्रों पर पड़ रहा है, बल्कि नए वीजा आवेदकों की भी सोशल मीडिया जांच शुरू हो गई है। ओपन डोर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में अमेरिका में 11 लाख से अधिक विदेशी छात्र पढ़ रहे थे, जिनमें से 3.31 लाख भारतीय थे। अब इनमें से कई छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

क्यों हो रही है कार्रवाई?

यह सख्ती इजरायल-हमास युद्ध के बाद अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हुए प्रदर्शनों के बाद शुरू हुई। पिछले साल गाजा में इजरायली कार्रवाई के खिलाफ कई छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसमें भारतीय छात्र भी शामिल थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने “कैच एंड रिवोक” नामक AI-आधारित प्रोग्राम लॉन्च किया है, जो सोशल मीडिया और अन्य डेटा की निगरानी कर ऐसे छात्रों की पहचान करता है। मार्च 2025 तक इस प्रोग्राम के तहत 300 से अधिक छात्रों के वीजा रद्द किए जा चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

भारतीय छात्रों पर क्या असर?

  • वीजा रद्द होने का खतरा: मामूली अपराध जैसे ओवरस्पीडिंग या सोशल मीडिया पर “राष्ट्र-विरोधी” पोस्ट करने पर भी वीजा रद्द हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का वीजा रद्द होने के बाद उन्हें सेल्फ-डिपोर्ट करना पड़ा।
  • नए आवेदनों पर सख्ती: वीजा आवेदन से पहले सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। अगर कुछ आपत्तिजनक पाया गया, तो वीजा से इनकार हो सकता है।
  • OPT का भविष्य अनिश्चित: एक प्रस्तावित बिल में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) खत्म करने की बात है, जिसके तहत छात्र पढ़ाई के बाद 1-3 साल तक अमेरिका में काम कर सकते हैं। अगर यह बिल पास हुआ, तो छात्रों को तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है।

सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

भारतीय विदेश मंत्रालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अमेरिकी कानूनों का पालन करें और ऐसी गतिविधियों से बचें जो उनके वीजा स्टेटस को खतरे में डाल सकती हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमारे दूतावास और वाणिज्य दूतावास जरूरत पड़ने पर छात्रों की मदद के लिए तैयार हैं।” वहीं, इमिग्रेशन विशेषज्ञ पूर्वी चोथानी ने चेतावनी दी कि यह स्थिति भारतीय छात्रों के करियर को प्रभावित कर सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो H-1B वीजा के लिए OPT पर निर्भर हैं।

सोशल मीडिया पर बहस

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, तो कुछ इसे अमेरिका की सुरक्षा नीति का हिस्सा मान रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सोशल मीडिया पर लाइक करने की सजा वीजा रद्द करना? यह तो हद है।” वहीं, एक अन्य ने कहा, “अमेरिका अपने नियम बनाता है, वहां पढ़ने गए तो मानने पड़ेंगे।”

फिलहाल, भारतीय छात्रों के लिए सलाह यही है कि वे सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें और स्थानीय नियमों का पालन करें, ताकि उनका अमेरिकी सपना अधूरा न रह जाए।

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