पूर्णिया : पूर्णिया के विद्या विहार आवासीय विद्यालय के रमेश चंद्र मिश्रा सभागार में आज एक अनूठा सांस्कृतिक और साहित्यिक महोत्सव — ‘ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल 2026’ — का भव्य शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस आयोजन में विभिन्न साहित्यिक विधाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुति और कला के अद्भुत रंग देखने को मिले, जिनमें देश भर से आए विद्वान, लेखक, शिक्षक, कवि तथा कला प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने स्वर्गीय डॉ. मदनेश्वर मिश्र तथा डॉ. श्यामानन्द सिंह के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिससे माहौल गहराई और श्रद्धा से भर उठा। आयोजन के संयोजकों ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन किया।
समारोह की शुरुआत में विद्या विहार समूह के प्राचार्य श्री निखिल रंजन ने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों और प्रतिष्ठान के सदस्यों में बौद्धिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि ऐसे मंच युवा प्रतिभाओं को अपने विचार, लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करते हैं।
विशेष सत्र में वरिष्ठ विद्वानों और पैनल के वक्ताओं ने समय के सामाजिक और साहित्यिक सवालों पर अपने अनुभव साझा किए। प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि सादगी, अनुशासन और जीवन की वास्तविकता को शब्दों में पिरोना ही सच्चा साहित्य है। इस मौके पर यह भी चर्चा हुई कि सीमांचल एवं पूर्णिया क्षेत्र की बहुभाषी सांस्कृतिक पहचान न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय साहित्यिक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम स्थल पर पुस्तक स्टॉल, कला प्रदर्शनियाँ, चित्रकला एवं क्राफ्ट प्रदर्शनी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। अलावा इसके, संगीत सत्र में शास्त्रीय गायन और वाद्य प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी समृद्ध बनाया, जिससे उपस्थित लोगों को सांगीतिक आनंद का अनुभव मिला।
तीन दिनों तक चलने वाले इस ज्ञान संगम महोत्सव का उद्देश्य साहित्य, कला, संगीत तथा शिक्षा के विविध रूपों को आबाद कर एक साझा मंच पर लाना है, जहाँ प्रतिभागी आपसी संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान से संस्कृति की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं।



