BIHAR : महावारी जैसे महत्वपूर्ण लेकिन संवेदनशील विषय पर समाज में फैली चुप्पी को तोड़ने और किशोर-किशोरियों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मथियापुर, पटना में एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का नेतृत्व सहयोगी संस्था ने किया, जिसमें कुल 105 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली की शुरुआत विद्यालय परिसर से हुई और छात्रों ने गांव की गलियों में “महावारी पर चुप्पी तोड़ो”, महावारी पर जानकारी बदलेगी दुनिया सारी”, बन्धन खोलो, चुप्पी तोड़ो” जैसे जागरूकता से भरे नारे लगाए। रैली में छात्राएं लाल पट्टी और हाथ में स्लोगन कार्ड लेकर चलीं, जिससे समुदाय में एक सशक्त संदेश गया कि महावारी कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान छात्राओं द्वारा महावारी विषय पर आधारित रंगोली और चित्रकला भी प्रस्तुत की गई, जिसने रैली को और भी प्रभावशाली बना दिया। चित्रों में स्वच्छता के महत्व, पैड के सही उपयोग और मिथकों के खिलाफ संदेश को आकर्षक रूप से दर्शाया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य रवींद्र कुमार चौधरी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किशोरियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ समाज को भी दिशा देते हैं। हमें मिलकर यह माहौल बनाना होगा, जहां महावारी पर खुलकर बात हो सके और गलत धारणाएं दूर हो सकें।

सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी ने छात्र-छात्राओं को धन्यवाद देते हुए कहा- आज की यह रैली केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक ठोस कदम है। महावारी एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन इसके बावजूद हमारे समाज में इससे जुड़ी चुप्पी, शर्म और मिथक आज भी गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं। जब बच्चे—खासकर किशोरियां—खुद आगे बढ़कर इस विषय पर खुलकर बात करती हैं, तो वह केवल अपनी सोच नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की सोच को बदलने की क्षमता रखती हैं। हमारी संस्था का प्रयास है कि हर लड़की को महावारी से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी मिले, उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले, और वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। इस रैली के माध्यम से हमने यही संदेश देने की कोशिश की है कि अब समय आ गया है कि हम महावारी पर बात करें—खुलकर, संवेदनशीलता के साथ और बिना किसी डर या शर्म के। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के सदस्य निर्मला, बिंदु, रूबी, प्रियंका, शारदा, लाजवंती, उषा, मोनिका, मनोज, धर्मेंद्र, फरहीन और खुशबू की सराहनीय भूमिका रही। सभी ने सामूहिक प्रयास से रैली को जनजागरूकता का सशक्त माध्यम बना दिया। इस रैली ने न सिर्फ छात्राओं को मंच दिया, बल्कि ग्रामीण समुदाय में भी यह संदेश गया कि महावारी पर बात करना जरूरी है—खुलकर, निर्भीकता से और समझदारी के साथ।

By अंग इंडिया न्यूज़

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