पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: PURNIA NEWS तीन थानों टीकापटी, मोहनपुर और रूपौली को जोड़ने वाले कांप घाट पर पुल के अभाव में यहां के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों थानों से घाट तक पक्की सड़कें पहुंच चुकी हैं, लेकिन पुल का निर्माण अभी तक नहीं किया गया है, जिससे न केवल आवागमन में मुश्किलें हो रही हैं, बल्कि क्षेत्र का समुचित विकास भी बाधित हो रहा है। तीन साल पहले नावार्ड द्वारा सर्वे टीम भेजी गई थी, जिन्होंने यहां सर्वे किया, लेकिन अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बरसात में नदी में बाढ़ आ जाने से यह क्षेत्र पूरी तरह से कट जाता है, और लोग तीन किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए चालीस किलोमीटर की यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं।सूखे दिनों में चचरी पुल से लोग लगभग छह किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए तेलडीहा और बिरौली मिल चैक तक पहुंचते हैं। लेकिन जैसे ही बरसात आती है, नदी में बाढ़ के कारण यह मार्ग भी बंद हो जाता है, और लोग नवटोलिया, बहुती, डोभा, रूपौली होते हुए तेलडीहा तक पहुंचते हैं, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ जाते हैं। यहां के किसान खासकर बरसात के समय बेहद प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनकी खेती की जमीन दोनों ओर फैली हुई है और वे अपनी फसल घर तक नहीं ले पाते।चचरी पुल भी ध्वस्त हो जाने से पूरी तरह से आवागमन रुक जाता है, जिससे किसान अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जैसे कि प्रमुख प्रतिमा देवी, पूर्व उपप्रमुख मीना देवी, मुखिया पंकज यादव, पूर्व मुखिया गौरी शर्मा और मुखिया सुलोचना देवी ने सरकार से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण शीघ्र किया जाए, ताकि यहां के लोग समुचित आवागमन के साथ-साथ विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकें और उनकी कृषि भी बेहतर तरीके से संपन्न हो सके। Post navigationPURNEA NEWS : गांजा तस्कर को दस साल कारावास और एक लाख रुपये का आर्थिक दण्ड, नहीं देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा PURNEA NEWS/शिक्षिका सावित्री बाई फूले की भूमिका में हमेशा रहीं प्रधानाध्यापिका रीता कुमारी बागमारा- गौतम
पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: PURNIA NEWS तीन थानों टीकापटी, मोहनपुर और रूपौली को जोड़ने वाले कांप घाट पर पुल के अभाव में यहां के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों थानों से घाट तक पक्की सड़कें पहुंच चुकी हैं, लेकिन पुल का निर्माण अभी तक नहीं किया गया है, जिससे न केवल आवागमन में मुश्किलें हो रही हैं, बल्कि क्षेत्र का समुचित विकास भी बाधित हो रहा है। तीन साल पहले नावार्ड द्वारा सर्वे टीम भेजी गई थी, जिन्होंने यहां सर्वे किया, लेकिन अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बरसात में नदी में बाढ़ आ जाने से यह क्षेत्र पूरी तरह से कट जाता है, और लोग तीन किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए चालीस किलोमीटर की यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं।सूखे दिनों में चचरी पुल से लोग लगभग छह किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए तेलडीहा और बिरौली मिल चैक तक पहुंचते हैं। लेकिन जैसे ही बरसात आती है, नदी में बाढ़ के कारण यह मार्ग भी बंद हो जाता है, और लोग नवटोलिया, बहुती, डोभा, रूपौली होते हुए तेलडीहा तक पहुंचते हैं, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ जाते हैं। यहां के किसान खासकर बरसात के समय बेहद प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनकी खेती की जमीन दोनों ओर फैली हुई है और वे अपनी फसल घर तक नहीं ले पाते।चचरी पुल भी ध्वस्त हो जाने से पूरी तरह से आवागमन रुक जाता है, जिससे किसान अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जैसे कि प्रमुख प्रतिमा देवी, पूर्व उपप्रमुख मीना देवी, मुखिया पंकज यादव, पूर्व मुखिया गौरी शर्मा और मुखिया सुलोचना देवी ने सरकार से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण पुल का निर्माण शीघ्र किया जाए, ताकि यहां के लोग समुचित आवागमन के साथ-साथ विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकें और उनकी कृषि भी बेहतर तरीके से संपन्न हो सके।