जोगबनी-कोलकाता चितपुर एक्सप्रेस: 18 वर्षों का लंबा इंतजार, अब तक नहीं हो सकी नियमित

प्रिंस कुमार, अररिया: भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण ‘लाइफलाइन’ मानी जाने वाली जोगबनी-कोलकाता (चितपुर) एक्सप्रेस अपनी शुरुआत के 18 साल बाद भी नियमित होने की राह देख रही है। सीमावर्ती क्षेत्र की बढ़ती परिवहन जरूरतों और व्यापारिक महत्ता को देखते हुए इस ट्रेन को प्रतिदिन चलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।

ऐतिहासिक सफर: 18 साल पहले हुई थी शुरुआत
उल्लेखनीय है कि इस ट्रेन का सफर 4 जून 2008 को शुरू हुआ था। यह जोगबनी-कटिहार रेलखंड पर आमान परिवर्तन (बड़ी लाइन) के बाद चलने वाली पहली ट्रेन थी।

वर्तमान संकट: विडंबना यह है कि 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद यह ट्रेन सप्ताह में केवल तीन दिन (मंगलवार, गुरुवार और शनिवार) ही चलती है।

अपर्याप्त सेवा: स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि यात्रियों के भारी दबाव के मुकाबले हफ्ते में तीन दिन का परिचालन ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

आर्थिक और सामाजिक महत्व: क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’
यह ट्रेन केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि अररिया जिले और पड़ोसी देश नेपाल के विराटनगर के लोगों के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक कड़ी है:

चिकित्सा और शिक्षा: बड़ी संख्या में मरीज बेहतर इलाज के लिए और छात्र उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता जाते हैं।

व्यापारिक संबंध: नेपाल के साथ होने वाले व्यापार के लिए कोलकाता एक प्रमुख केंद्र है, ऐसे में ट्रेन का दैनिक परिचालन व्यापारिक लागत को कम करने में सहायक होगा।

रेलवे प्रशासन की पहल: डीआरएम ने भेजा प्रस्ताव
यात्रियों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए कटिहार मंडल के डीआरएम किरेन्द्र नरह ने सकारात्मक रुख अपनाया है। डीआरएम ने इस ट्रेन को प्रतिदिन चलाने का विस्तृत प्रस्ताव 12 अगस्त 2025 को मंडल कार्यालय से रेलवे मुख्यालय को भेज दिया है। अब गेंद रेलवे बोर्ड के पाले में है और उम्मीद जताई जा रही है कि भारत-नेपाल संबंधों और क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इसे हरी झंडी मिल सकती है।

जनभावना और नागरिक संगठनों की मांग
इंडो-नेपाल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रेल यूजर्स और विभिन्न व्यापारिक संघों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। हाल ही में कटिहार में हुई डीआरयूसीसी (DRUCC) की बैठक में भी इस मांग को पुरजोर तरीके से रखा गया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस ट्रेन को नियमित करने से न केवल भारतीय यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि पर्यटन के जरिए रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी।

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