पूर्णिया/पटना: इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी, जब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में भगवान शिव लिंगरूप में प्रकट हुए थे। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, व्यतिपात योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग में शिव-पार्वती की विधिवत पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।खास बात यह है कि सूर्य और शनि (पिता-पुत्र) दोनों कुंभ राशि में स्थित रहेंगे, जो भगवत साधना और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी है। पटना और पूर्णिया समेत बिहार के सभी प्रमुख शिव मंदिरों (जैसे बूढ़ानाथ, सिंहेश्वर धाम, पशुपतिनाथ आदि) में सुबह से जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और संध्या में भव्य शिव श्रृंगार होगा। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा और भांग से भगवान शिव की पूजा करेंगे। पंडित जी ने ईशान संहिता का हवाला देते हुए कहा कि इस रात्रि में शिव ने सृष्टि के संरक्षण और संहार का सृजन किया था।विभिन्न वस्तुओं का महत्व भी बताया गया—गंगाजल से मानसिक अशांति मुक्ति, दूध से स्वास्थ्य, घी से बुद्धि-विवेक, मधु से मधुर वाणी, गुड़ से कष्ट नाश, भांग से नकारात्मक ऊर्जा का अंत, और बेलपत्र से संपत्ति प्राप्ति होती है। बिहार के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ की उम्मीद है, और सिंहेश्वर धाम में इस बार मेला भी खास होने वाला है। पंडित राकेश झा ने सभी श्रद्धालुओं से उपवास, रात्रि जागरण और शिव भजन का संकल्प लेने की सलाह दी है। Post navigationपूर्णिया में जनमन पीपुल्स फाउंडेशन ने विश्व कैंसर दिवस पर KGBV छात्राओं के लिए सर्वाइकल एवं स्तन कैंसर जागरूकता अभियान चलाया सूरज बिहारी हत्याकांड: बेटे के इंसाफ की आस में पिता ने भी तोड़ा दम