अंग इंडिया संवाददाता/रूपौली/
प्रखंड क्षेत्र के मेंहदी गांव में आयोजित दो दिवसीय संतमत सतसंग के समापन दिवस पर महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के परम शिष्य स्वामी लालजी महाराज ने मानव जीवन की सार्थकता पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यदि इस जीवन में सतसंग, साधना और आत्मचिंतन नहीं किया गया, तो जीवन का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
स्वामी लालजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संतमत की वैदिक परंपरा मनुष्य को भीतर की शांति, सत्य और सदाचार की राह दिखाती है। जब तक मन निर्मल नहीं होगा, तब तक ईश्वर का साक्षात्कार संभव नहीं है। उन्होंने भौतिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि आज का मानव बाहरी सुख-साधनों की ओर दौड़ रहा है, जबकि सच्चा आनंद मनुष्य के भीतर ही निहित है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को भजन, ध्यान, सदग्रंथों के अध्ययन और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि इसी से आत्मा का कल्याण संभव है। स्वामी लालजी महाराज ने विशेष रूप से युवाओं से संतमत के सिद्धांतों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी अध्यात्म की राह पर चले, तो समाज से नशा, हिंसा और कुरीतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी।
सतसंग के दौरान अन्य साधु-संतों ने भी अपने-अपने प्रवचनों के माध्यम से संतमत को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अवसर पर विधायक कलाधर मंडल ने भी संत-महात्माओं से आशीर्वाद प्राप्त किया।
दो दिवसीय इस संतमत सतसंग में क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।



