पूर्णिया, विमल किशोर: बिहार की आर्थिक धारा को संजीवनी देने वाले प्रवासी मजदूरों के सम्मान और हक की लड़ाई में अमौर विधायक और एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने विधानसभा सत्र में एक अहम और मानवीय मांग उठाई है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जैसे दुर्घटना में मृत्यु होने पर प्रवासी मजदूरों के शव को सरकारी खर्च पर घर लाने का प्रावधान है, वैसे ही प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में भी उनका पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक उनके पैतृक निवास तक पहुँचाने की जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए।विधायक ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूरों की मौत चाहे दुर्घटना में हो या स्वाभाविक रूप से, दोनों ही मामलों में परिवार पर भारी संकट और दुःख आता है। अधिकांश प्रवासी मजदूर अत्यधिक निर्धन होते हैं, और दूसरे राज्य या विदेश से शव लाना उनके लिए असंभव होता है, क्योंकि यह लाखों रुपये का खर्चा हो सकता है। इन मजदूरों द्वारा राज्य को रेमिटेंस और टैक्स के रूप में जो योगदान दिया जाता है, उसे ध्यान में रखते हुए सरकार को संकट की इस घड़ी में उनका साथ देना चाहिए।अख्तरुल ईमान ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूर बिहार की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ हैं, और उनका भेजा हुआ पैसा राज्य के बाजारों और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मजदूरों का खून-पसीना ही बिहार की तरक्की की बुनियाद है, और जब एक मजदूर बाहरी राज्य या देश में दम तोड़ता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार टूट जाता है।इसलिए, सरकार को मानवता और सामाजिक न्याय का परिचय देते हुए प्राकृतिक मृत्यु के मामलों में भी शव वापसी की प्रक्रिया को शीघ्र लागू करना चाहिए, ताकि संकट के समय मजदूरों के परिवारों को सरकार का पूरा सहयोग मिल सके। Post navigationमहाशिवरात्रि पर जगदीश्वर नाथ मंदिर बेलगच्छी में अखंड हरी नाम संकीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन अमौर में 20 फरवरी को दिव्यांगजन UDID कार्ड शिविर, शत-प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य
पूर्णिया, विमल किशोर: बिहार की आर्थिक धारा को संजीवनी देने वाले प्रवासी मजदूरों के सम्मान और हक की लड़ाई में अमौर विधायक और एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने विधानसभा सत्र में एक अहम और मानवीय मांग उठाई है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जैसे दुर्घटना में मृत्यु होने पर प्रवासी मजदूरों के शव को सरकारी खर्च पर घर लाने का प्रावधान है, वैसे ही प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में भी उनका पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक उनके पैतृक निवास तक पहुँचाने की जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए।विधायक ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूरों की मौत चाहे दुर्घटना में हो या स्वाभाविक रूप से, दोनों ही मामलों में परिवार पर भारी संकट और दुःख आता है। अधिकांश प्रवासी मजदूर अत्यधिक निर्धन होते हैं, और दूसरे राज्य या विदेश से शव लाना उनके लिए असंभव होता है, क्योंकि यह लाखों रुपये का खर्चा हो सकता है। इन मजदूरों द्वारा राज्य को रेमिटेंस और टैक्स के रूप में जो योगदान दिया जाता है, उसे ध्यान में रखते हुए सरकार को संकट की इस घड़ी में उनका साथ देना चाहिए।अख्तरुल ईमान ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूर बिहार की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ हैं, और उनका भेजा हुआ पैसा राज्य के बाजारों और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मजदूरों का खून-पसीना ही बिहार की तरक्की की बुनियाद है, और जब एक मजदूर बाहरी राज्य या देश में दम तोड़ता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार टूट जाता है।इसलिए, सरकार को मानवता और सामाजिक न्याय का परिचय देते हुए प्राकृतिक मृत्यु के मामलों में भी शव वापसी की प्रक्रिया को शीघ्र लागू करना चाहिए, ताकि संकट के समय मजदूरों के परिवारों को सरकार का पूरा सहयोग मिल सके।