रूपौली में नीलगाय-सूअर का कहर बेकाबू: रोज़ दो एकड़ फसल तबाह, दो साल से किसान चक्कर काटते थक गए

पूर्णिया, अभय कुमार सिंह; रूपौली प्रखंड के दर्जनों गाँवों में नीलगाय और जंगली सूअरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। किसान बताते हैं कि रोज़ाना कम-से-कम दो एकड़ तैयार फसल या तो खा दी जाती है या रौंदकर बर्बाद कर दी जाती है। मक्का, आलू, गेहूँ से लेकर सब्ज़ियों तक कोई फसल सुरक्षित नहीं बची है। पिछले दो वर्षों से मेहदी, बघवा, बैरिया, तेलडीहा, गोडियर, टीकापट्टी सहित सैकड़ों किसान प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

किसान सुशील मंडल, विजय कुमार सिंह, पिंटू मंडल, अजीत चौबे, रबी सिंह और विनोद केशरी जैसे सैकड़ों प्रभावितों का कहना है कि नीलगाय तो आपस में लड़ते-लड़ते भी फसल चट कर जाती हैं, जबकि सूअर आलू की फसल को जड़ से उखाड़ देते हैं। सरकार की 2022 की अधिसूचना के तहत मुखिया को नीलगाय-सूअर मारने का अधिकार है और शूटर टीम को पंचायत कोष से भुगतान का प्रावधान भी है, फिर भी मुखिया-पंचायत सचिव टालमटोल करते रहे हैं। थक-हारकर किसान अब “भगवान भरोसे” खेती करने को मजबूर हैं।

बीडीओ अरविंद कुमार का कहना है कि उनके पास अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आवेदन या पत्र नहीं पहुँचा है। आवेदन आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। किसानों का सवाल है कि जब दो साल से चक्कर कट रहे हैं, तब भी फाइल क्यों नहीं खुली? अब देखना यह है कि “किसान-हितैषी” सरकार इन जंगली जानवरों से कब राहत दिलाती है।

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