पूर्णिया : पूर्णिया विश्वविद्यालय के छात्र सह छात्र नेता रितेश यादव ने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों में सेमेस्टर थर्ड (CBCS सत्र 2024–28) के छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन पंजीयन एवं परीक्षा प्रपत्र भरने की तिथि अंतिम रूप से विस्तारित की गई, लेकिन यह विस्तार ₹200 के अतिरिक्त विलंब शुल्क के साथ लागू किया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब तिथि विस्तार विश्वविद्यालय की प्रशासनिक परिस्थितियों, परीक्षा विभाग की शिथिलता और कई महाविद्यालयों द्वारा समय पर अंक (मार्क्स) प्रेषित नहीं किए जाने के कारण हुआ, तो इसका आर्थिक भार छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है?
रितेश यादव ने इसे छात्रों का खुला आर्थिक शोषण बताते हुए कहा कि पूर्णिया क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा और सुदूर है, जहां अधिकांश अभिभावक कृषि पर निर्भर हैं। विद्यार्थियों की कोई गलती नहीं होने के बावजूद उन्हें दंडित किया जा रहा है, जिससे उनके समय, शिक्षा और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विलंब शुल्क लिया जा रहा है, जो छात्रों से अनावश्यक आर्थिक वसूली को दर्शाता है, जबकि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं दिखती।
साथ ही, पांचवें सेमेस्टर में इंटर्नशिप के नाम पर ₹400 से ₹600 तक शुल्क लिए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब अनेक सरकारी संस्थान, कंपनियां और एनजीओ सामाजिक दायित्व का दावा करते हैं, तो इंटर्नशिप निशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा सकती? क्या निर्धन छात्र कोष या विशेष योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत देने की कोई व्यवस्था है?
वही छात्र नेता विकाश कुमार ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल नोटिस जारी कर विलंब शुल्क लेना बंद करे। साथ ही, परीक्षा प्रपत्र के विलंब शुल्क के रूप में अब तक जितनी भी राशि छात्रों से वसूली गई है, उसे अविलंब वापस किया जाए, ताकि छात्रों को आर्थिक राहत मिल सके और अनावश्यक दोहन पर रोक लगे।



