पटना: पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई की मांग को लेकर जारी जन आंदोलन को लेकर बिहार की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। इस बीच पूर्व सांसद और बागी तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले आनंद मोहन ने प्रभुनाथ सिंह के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रभुनाथ सिंह के साथ अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। आनंद मोहन ने इस आंदोलन को जनता की आवाज बताते हुए उसे पूरा समर्थन देने की घोषणा की है।उन्होंने कहा, “जब भी चुनाव नजदीक आता है, समाज को बांटने और जहर घोलने वाली ताकतें सक्रिय हो जाती हैं। इनका मकसद सिर्फ एक होता है – जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाना।” उन्होंने चेतावनी दी कि समाज को ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो धर्म, जाति और वर्ग के नाम पर नफरत फैलाते हैं।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विश्वास जताते हुए आनंद मोहन ने कहा, “2025 में नीतीश कुमार ऐतिहासिक दसवीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे। इसमें कोई दोराय नहीं है। नीतीश जी का कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे कभी भी तुष्टिकरण या समझौते की राजनीति का हिस्सा नहीं बने, चाहे उन्हें इसकी कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़ी हो।विवादित बयानों से सुर्खियां बटोरने वालों पर भी आनंद मोहन ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कौन जिंदाबाद और कौन मुर्दाबाद है, इसका प्रमाणपत्र बांटने वाले समाज के सबसे बड़े गुनहगार हैं। आज जरूरत इस बात की है कि समाज अपने सच्चे नायकों को पहचाने – वो चाहे किसी भी वर्ग या जाति से क्यों न हों, अगर उन्होंने समाज के लिए संघर्ष किया है तो वे असली नायक हैं।”बातचीत के अंत में उन्होंने अपने अंदाज में दो टूक कहा, “सच बोलना अगर बगावत है, तो समझो हम बागी हैं।” आनंद मोहन की इस मुखरता ने बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर वे आत्मसम्मान की राजनीति का प्रतीक बनते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयान कई दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। Post navigationBetter Health: हाथीपांव मरीजों को मिलेगा राहत का सामान, बिहार में सभी चिन्हित फ़ाइलेरिया मरीजों को मिलेगा 100% MMDP किट! Muharram 2025 : पटना में राबड़ी देवी के आवास पहुंचा ताजिया जुलूस, लालू यादव ने देखा अखाड़े का करतब
पटना: पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई की मांग को लेकर जारी जन आंदोलन को लेकर बिहार की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। इस बीच पूर्व सांसद और बागी तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले आनंद मोहन ने प्रभुनाथ सिंह के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रभुनाथ सिंह के साथ अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। आनंद मोहन ने इस आंदोलन को जनता की आवाज बताते हुए उसे पूरा समर्थन देने की घोषणा की है।उन्होंने कहा, “जब भी चुनाव नजदीक आता है, समाज को बांटने और जहर घोलने वाली ताकतें सक्रिय हो जाती हैं। इनका मकसद सिर्फ एक होता है – जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाना।” उन्होंने चेतावनी दी कि समाज को ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो धर्म, जाति और वर्ग के नाम पर नफरत फैलाते हैं।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विश्वास जताते हुए आनंद मोहन ने कहा, “2025 में नीतीश कुमार ऐतिहासिक दसवीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे। इसमें कोई दोराय नहीं है। नीतीश जी का कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे कभी भी तुष्टिकरण या समझौते की राजनीति का हिस्सा नहीं बने, चाहे उन्हें इसकी कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़ी हो।विवादित बयानों से सुर्खियां बटोरने वालों पर भी आनंद मोहन ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कौन जिंदाबाद और कौन मुर्दाबाद है, इसका प्रमाणपत्र बांटने वाले समाज के सबसे बड़े गुनहगार हैं। आज जरूरत इस बात की है कि समाज अपने सच्चे नायकों को पहचाने – वो चाहे किसी भी वर्ग या जाति से क्यों न हों, अगर उन्होंने समाज के लिए संघर्ष किया है तो वे असली नायक हैं।”बातचीत के अंत में उन्होंने अपने अंदाज में दो टूक कहा, “सच बोलना अगर बगावत है, तो समझो हम बागी हैं।” आनंद मोहन की इस मुखरता ने बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर वे आत्मसम्मान की राजनीति का प्रतीक बनते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयान कई दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।