पूर्णिया: नेपाल के वराहक्षेत्र और बिहार के सीमांचल के बीच गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक संबंध माना जाता है, जिसकी जड़ें करीब तीन सौ वर्ष पुराने उस लोकविश्वास से जुड़ी हैं, जिसमें पूर्णिया क्षेत्र में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों से मुक्ति का श्रेय वराहक्षेत्र के सिद्ध पुरुष औलिया बाबा को दिया जाता है; मान्यता है कि मुगल काल के बाद बंगाली नवाबों के शासन में हिंदुओं को पूर्णिया शहर में रात बिताने तक की अनुमति नहीं थी, तब कोशी तट के गुप्तवराह गुफा में तपस्या करने वाले औलिया बाबा ने अपने चमत्कारों और साहस से नवाब को झुकने पर मजबूर किया, हिंदुओं को स्वतंत्रता दिलाई और काली मंदिर की स्थापना करवाई, जिसके बाद उन्होंने सीमांचल के हिंदुओं से जीवन में एक बार वराहक्षेत्र आने का वचन लिया; यही कारण है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीमांचल के श्रद्धालु कार्तिक मेले में वराहक्षेत्र आकर कोशी स्नान और पूजा करते रहे, हालांकि आज परंपराओं के क्षीण होने और सामाजिक बदलावों के चलते यह आवाजाही कम होती दिख रही है, लेकिन आस्था रखने वालों का मानना है कि औलिया बाबा को दिया गया वह वचन सीमांचल के हर हिंदू को आज भी स्मरण रखना चाहिए।