सीमांचल की शिक्षा-ज्योति बुझी : डॉ. इंदुबाला सिंह के निधन से शोक में डूबा पूर्णिया

पूर्णिया : सीमांचल के शैक्षणिक और सामाजिक जीवन के लिए आज का दिन गहरे शोक का दिन बन गया। शिक्षा-जगत की प्रखर विदुषी, अनुशासनप्रिय प्रशासक और प्रेरणास्रोत डॉ. इंदुबाला सिंह ने शुक्रवार रात्रि लगभग 1 बजे पूर्णिया के सिपाही टोला स्थित अपने आवास पर हृदयाघात के कारण अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार फैलते ही पूर्णिया सहित पूरे सीमांचल में शोक की लहर दौड़ गई।

फरवरी 1944 में जन्मी डॉ. सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, संस्कार और समाजसेवा को समर्पित कर दिया। वे केवल एक शिक्षाविद नहीं, बल्कि एक युग की प्रतिनिधि थीं। वर्ष 1965 से 1981 तक उन्होंने एमजीएम महिला कॉलेज, पूर्णिया में अर्थशास्त्र की व्याख्याता के रूप में छात्राओं को ज्ञान के साथ जीवन-मूल्यों का पाठ पढ़ाया। इसके पश्चात 1981 से 2006 तक पूर्णिया महिला कॉलेज, पूर्णिया की प्राचार्या के रूप में उन्होंने संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अनुशासन व गुणवत्ता की मिसाल स्थापित की।

उनकी प्रशासनिक दक्षता, दूरदर्शिता और निष्पक्ष कार्यशैली के कारण वर्ष 1997 में उन्हें भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा का कुलपति नियुक्त किया गया। बाद में वर्ष 2006 में उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। अपने कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता, गुणवत्ता और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा, जिससे विश्वविद्यालयों में सकारात्मक व दीर्घकालिक परिवर्तन देखने को मिले।

डॉ. इंदुबाला सिंह शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़ी रहीं। उनका निवास स्थान समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए सदैव खुला रहता था। वे विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहीं और समाज में नैतिकता, संस्कार तथा शैक्षणिक जागरूकता की अलख जगाती रहीं।

निधन का समाचार मिलते ही उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आँख नम थी और हर ज़ुबान पर एक ही भाव—ऐसी महान शिक्षाविद का मिलना अब कठिन है।

डॉ. इंदुबाला सिंह का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अवसान है। पूर्णिया सहित पूरे सीमांचल के शैक्षणिक, सामाजिक और बौद्धिक जगत में उनकी कमी सदैव महसूस की जाएगी। उनकी स्मृतियाँ, आदर्श और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

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