पूर्णिया विश्वविद्यालय में बीएड प्रमाणपत्र में गंभीर चूक, गलती पर पर्दा

पूर्णिया: पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। बीएड सत्र 2019-21 के कई छात्रों के मूल प्रमाणपत्रों में पास होने की तिथि ही दर्ज नहीं है। इस चूक का खुलासा तब हुआ जब छात्रों ने अपने प्रमाणपत्र सोशल मीडिया पर साझा किए और कई ने विभाग से लिखित शिकायतें भी दर्ज कराईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये प्रमाणपत्र परीक्षा नियंत्रक, कुलसचिव और कुलपति के हस्ताक्षर के बाद ही जारी किए गए हैं। पिछले छह महीनों में विश्वविद्यालय में कई परीक्षा नियंत्रक बदले गए, जिसके कारण प्रशासनिक कार्यकुशलता पर असर पड़ा। इस अव्यवस्था के बीच बीएड छात्रों के प्रमाणपत्र जारी तो किए गए, लेकिन उनमें गंभीर त्रुटियां रह गईं। बताया जाता है कि परीक्षा विभाग ने अंतिम सत्यापन किए बिना ही प्रमाणपत्र छाप दिए, जिससे यह गलती सामने आई।

  • गलती पर पर्दा

परीक्षा नियंत्रक डॉ. उदय नारायण सिंह ने बताया कि यह प्रिंटिंग की त्रुटि है। जहां हजारों की संख्या में प्रमाण पत्र छपते हैं, वहां इस प्रकार की एकाध त्रुटि हो जाती है। संबंधित छात्र-छात्रा इस अशुद्धि को सुधारने के लिए जब आवेदन करते हैं, तो इसमें सुधार किया जाता है। लेकिन जो मूल प्रमाण पत्र वायरल हो रहा है, वह किसी कॉलेज में अप्राप्त है। फिर अमान्य प्रमाण पत्र, जिसमें अशुद्धियां साफ-साफ झलक रही हैं, उसे वायरल करना अपने आप में गलत है।

परीक्षा नियंत्रक ने सवालिया अंदाज में कहा कि छात्रा को यह बताना चाहिए कि यह प्रमाण पत्र उसे कहां से प्राप्त हुआ है। क्या वायरल प्रमाण पत्र को सुधारने के लिए छात्रा ने परीक्षा विभाग में आवेदन किया है? इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों की पहचान कर उन पर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।

प्रभावित छात्रों का कहना है कि पास होने की तिथि, ग्रेड प्रिंटिंग के अभाव में वे विभिन्न शिक्षण संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। कई छात्र अपनी डिग्री को मान्यता दिलाने में भी असमर्थ हैं। इस पर छात्र संगठनों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि त्रुटिपूर्ण प्रमाणपत्र तुरंत बदले जाएं और सही तिथि सहित नए प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। साथ ही, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी जोरदार मांग की जा रही है।

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