पूर्णियाँ : स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर हरदा स्थित पार्वती मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय (सरस्वती विद्या निकेतन) के प्रांगण में ‘स्वच्छ भारत दिवस 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों एवं जीविका दीदियों की मौजूदगी में हरदा पंचायत को स्वच्छ, नशामुक्त एवं बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
हरदा की स्वच्छता पूरे जिले के सम्मान से जुड़ी :
डीएम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि हरदा पंचायत पूर्णिया जिले का मुख्य प्रवेश द्वार है। पटना की ओर से आने वाले लोगों के लिए यह जिले का पहला प्रभाव छोड़ता है। ऐसे में हरदा को कचरा मुक्त और स्वच्छ रखना केवल पंचायत की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे जिले के स्वाभिमान से जुड़ा विषय है।उन्होंने कहा कि 17 सितंबर से शुरू किया गया स्वच्छता अभियान, रात्रि चौपाल और डस्टबिन वितरण स्वच्छता की दिशा में शुरुआत है। इसे स्थायी रूप देने के लिए स्वच्छता को प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने लोगों से प्रशासन और नगर निगम पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वयं भी स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता पर जोर
जिलाधिकारी ने बाल विवाह को सामाजिक बुराई के साथ-साथ कानूनी अपराध बताते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। समाज का दायित्व है कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने का अवसर मिले।उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया और कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
नशामुक्त समाज बनाने में जीविका दीदियों की भूमिका अहम
नशामुक्ति को लेकर जिलाधिकारी ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होता है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने में जीविका दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, बाल विवाह उन्मूलन एवं नशामुक्ति को लेकर सामूहिक सहभागिता और जागरूकता पर जोर दिया गया।