भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ‘भारत-नेपाल मंच’ ने उठाई आवाज; कोसी प्रदेश के पर्यटन सचिव से की मुलाकात

प्रिंस कुमार, अररिया: नेपाल में हाल के दिनों में भारतीय पर्यटकों के साथ हुए दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं ने दोनों देशों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को भारत-नेपाल सामाजिक सांस्कृतिक मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोसी प्रदेश के वन, पर्यावरण तथा पर्यटन मंत्रालय के सचिव इंद्र सापकोटा से विशेष मुलाकात की।

पर्यटकों की सुरक्षा और असुविधाओं पर जताई चिंता
मंच के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा, सलाहकार महेश साह स्वर्णकार और पर्यावरणविद् सुरेश शर्मा ने सचिव को बताया कि भारतीय पर्यटकों को नेपाल प्रवास के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भंसार क्षेत्र में समस्या: प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि भंसार (कस्टम) इलाके में शौचालयों की भारी कमी है, जिससे महिला पर्यटकों को अत्यधिक परेशानी होती है। पर्यटकों के पास नकद राशि होने पर गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजे के भय के कारण वे नेपाल आने से कतरा रहे हैं।

सुरक्षा के लिए ‘मैत्री स्वयंसेवक’ और ऑनलाइन एंट्री की पहल
पर्यटन सचिव इंद्र सापकोटा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं कुछ ही दिनों के भीतर सीमा पर ‘पर्यटक मैत्री स्वयंसेवक’ नियुक्त किए जाएंगे। ये स्वयंसेवक ट्रैफिक पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की निगरानी करेंगे और पर्यटकों की मदद करेंगे।

डिजिटल एंट्री: पर्यटकों के पास कितनी राशि है और वे कहाँ रुकेंगे, इसकी ऑनलाइन एंट्री बॉर्डर पर ही होगी। एक बार ‘जांच स्टीकर’ लगने के बाद नेपाल के अंदर पर्यटकों को दोबारा परेशान नहीं किया जाएगा। मंत्री भीम पराजूली के निर्देशानुसार, पर्यटक सरकारी मापदंड के अनुरूप नेपाली रुपये साथ ले जा सकेंगे।

धार्मिक पर्यटन: रामधूनी को अयोध्या-जनकपुर से जोड़ने की तैयारी
बैठक में कोसी प्रदेश सरकार ने एक बड़ी योजना साझा की। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान भगवान रामचंद्र ने सुनसरी जिले के जंगल में धूनी जलाई थी, जो आज भी ‘रामधूनी’ के रूप में अनवरत जल रही है। कोसी प्रदेश सरकार रामधूनी को अयोध्या (भारत) और जनकपुर (नेपाल) के धार्मिक सर्किट से जोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि इन कदमों से भारतीय पर्यटकों के मन में सुरक्षा का भाव जागेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को फिर से गति मिलेगी।

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