पूर्णिया: रविवार शाम ढलते ही पूर्णिया शहर पर काले बादलों का कहर टूट पड़ा। कुछ ही घंटों की मूसलधार बारिश ने पूरे इलाके को जैसे जलप्रलय में बदल दिया। तेज बारिश से न केवल शहर की सड़कें डूब गईं, बल्कि खेत-खलिहान, घर-दुकान और रिहायशी इलाके तक पानी में समा गए। शहर के लगभग हर मोहल्ले में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
धान की फसल हुई बर्बाद, किसानों की सालभर की मेहनत डूबी
शहरी इलाकों के साथ-साथ बारिश का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्र की खेती पर पड़ा है। आसपास के खेतों में लगी धान की तैयार फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में धान की रोपनी की थी, लेकिन यह अचानक बारिश और जलभराव उनकी मेहनत पर पानी फेर गया। खेतों में अभी तक पानी भरा है, और फसल के सड़ने की आशंका से किसान बेहद परेशान हैं।
घरों में घुसा पानी, घरेलू सामान हुआ बर्बाद
भारी बारिश से सिर्फ बाहर की दुनिया नहीं, बल्कि लोगों का घर-संसार भी प्रभावित हुआ। दर्जनों मोहल्लों जैसे भट्ठा बाजार, आर्यन का चौक, शिवपुरी, मधुबनी, रजनी चौक और बसंत बिहार में घरों के भीतर तक पानी घुस गया। लोगों के फर्नीचर, कपड़े, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और राशन का भारी नुकसान हुआ है। कई घरों में रेफ्रिजरेटर, टीवी और वॉशिंग मशीनें पानी में डूब गईं, जिनकी मरम्मत अब संभव नहीं दिख रही।
कई परिवार हुए बेघर, सुरक्षित ठिकानों की तलाश में लोग
बारिश से उत्पन्न जलजमाव ने कई लोगों को रातोंरात बेघर कर दिया। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों या रिश्तेदारों के पास शरण लेनी पड़ी। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी दयनीय हो गई है। राहत केंद्रों का कहीं कोई इंतजाम नहीं होने के कारण लोग बिना किसी सहायता के ही अपनी जान बचाने को मजबूर हैं।
व्यापारिक इलाकों में तबाही, करोड़ों का माल खराब
शहर के प्रमुख बाजारों — भट्ठा बाजार, गुलाबबाग और खीरू चौक — में दुकानों में पानी घुस गया, जिससे लाखों-करोड़ों का सामान नष्ट हो गया। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रोसरी और फर्नीचर दुकानों के मालिकों का कहना है कि उनकी महीनों की कमाई कुछ घंटों की बारिश में तबाह हो गई। व्यापारियों ने स्थानीय प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार जलजमाव की समस्या उठती है, लेकिन समाधान कभी नहीं होता।
जनता का फूटा गुस्सा, नगर निगम पर लापरवाही का आरोप
लोगों का कहना है कि नगर निगम ने बारिश से पहले नालों की सफाई नहीं कराई। सड़कों पर पानी उफनकर बह रहा है और कहीं भी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं दिख रही है। कई स्थानों पर नाले जाम हैं, जिनकी वजह से सड़कों ने नदियों का रूप ले लिया है। खजांची चौक के एक दुकानदार ने कहा, “हर बार बस आश्वासन मिलता है, लेकिन नतीजा यही होता है – तबाही।”
जनता की मांगें: तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान
- सभी नालों की युद्धस्तर पर सफाई
- पानी निकालने के लिए विशेष टीमों की तैनाती
- किसानों और व्यापारियों के नुकसान का आकलन कर मुआवजा योजना लागू
- प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और जरूरी राहत सामग्री
- जलजमाव और शहरी बाढ़ नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक नीति
पूर्णिया के लोग अब इंतजार में हैं कि क्या प्रशासन इस बार केवल कागजी बयान देगा या ज़मीनी स्तर पर कुछ ठोस कार्रवाई होगी। अभी हालात यह हैं कि बारिश थमने के बाद भी पानी घटने का नाम नहीं ले रहा और लोग अपने ही घरों में बेबस कैद हैं।




