PURNIA NEWS,अभय कुमार सिंह : बाबू जब हम्मे सीनी बाढ के पानी में डूबी के मरी जैबे, तब सरकार के बाढ दिखतै । उक्त पीडा हर उस बाढ पीडितों का है, जो पिछले एक पखवारा से बाढ से जूझ रहे हैं । फसलें तो पहले ही डूब चूकी हैं । जबकि शुक्रवार तक इस क्षेत्र में जिला से आये आलाधिकारी भी बाढ का निरीक्षण करके गए हैं । उनका मानना है कि अभी राहत लायक बाढ नहीं आयी है । पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं, चारा की समस्या मुंह बाए खडी है । यह बता दें पिछले एक पखवारा से यहां के लगभग दस पंचायतें कोयली सिमडा पूरब, पश्चिम, गोडियरपटी श्रीमाता, लक्ष्मीपुर छर्रापटी, भौवा प्रबल, कांप, विजय मोहनपुर, विजय लालगंज, डोभा मिलिक एवं नाथपुर पंचायत की लगभग पचास हजार की आवादी बाढ के कहर से कराह रही है । फसलें एक पखवारा पहले ही डूब चूकी हैं । स्थिति यह है कि हर पंचायतों की सडकों पर नाव चलने लगी हैं ।
जिधर देखें, उधर समंदर जैसे दृश्य दिख रहे हैं । बावजूद प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं है कि यहां बाढ आयी हुई है । इस संबंध में बाढ के पानी से घिरी बाढ पीडित साधुपुर की गंुंजन देवी, सहोडा की अनिता देवी, पुरानी नंदगोला मुसहरी की पतिया देवी, कोशकीपुर की सुनीता देवी, सिमडा की मंजो देवी, जंगलटोला की शोभा देवी, बिंदटोली की सुभद्रा देवी, अंझरी की बीबी अफसाना खातून, दीनासिंह बासा की आढुला देवी, टोपडा की पतिया देवी आदि कहती हैं कि बाबू जब हम्मे सीनी बाढ के पानी में डूबी के मरी जैबे, तब दिखतै सरकार के बाढ । फसल डूबी गेले, घर में पानी छै, खाना बनावे के लिए पैसा नै छै कि गैस भरईये , जलावन नै छै, सतुआ खाय के कैन्हों पेट के आग बुझावे छिये । सरकारी आदमी आवे छै, नाव पर पिकनिक मनावे छै और देखला के बाद भी कहे छै कि बाढ नै छै । अगर बाढ के पानी नै छै त, उसीनी कैसे नाव से सबके घर पहुंची जाय छै । उनके दर्द को सुनकर कलेजा मुंह को आ रहा है ।
ऐसा लगता है कि इन बाढ पीडितों का दर्द सुननेवाला कोई नहीं है । अधिकारी बस उपर रिपोर्ट भेज दिये हैं, की बात कहकर पल्ला झाड लेते हैं । इस क्षेत्र में बाढ किस प्रकार अपना विनाशलीला दिखाती है, मुख्यमंत्री स्वयं यहां आकर देख चूके हैं, फिर भी अधिकारियों को यहां बाढ दिखती ही नहीं है । कुल मिलाकर इस भीषण बाढ ने पीडितों की कमर तोड दी है, फसलें नष्ट हो गयी हैं । उन्होंने डीएम अंशुल कुमार से स्वयं इसकी जांच कर, बाढ राहत चलाने की मांग की है ।




