पूर्णिया हादसे को लेकर अफवाह, हंगामा और साजिश की बू: डॉक्टरों पर हमला, यूट्यूब पर अफवाह, विपक्षी नेता की राजनीति

पूर्णिया: पूर्णिया के केनगर थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद जीएमसीएच में हुई अफरा-तफरी अब एक नई दिशा ले रही है। जहां एक ओर परिजनों की भावनात्मक प्रतिक्रिया को कुछ यूट्यूब चैनलों और राजनीतिक आकांक्षाओं ने जानबूझकर सरकार और डॉक्टरों को बदनाम करने का औजार बना दिया, वहीं अब अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सामने आकर सच्चाई रखी है।

दरअसल, हादसे में गंभीर रूप से घायल तीनों युवकों को जीएमसीएच लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। मृतकों में अररिया के फरकिया निवासी मो. नाजिम भी शामिल थे। लेकिन जब पोस्टमार्टम हॉल में परिजन शव पर विलाप कर रहे थे, तब फेफड़ों पर दबाव पड़ने से नाक से झाग व खून मिश्रित तरल निकलने लगा। परिजन इसे ‘जीवित होने’ का संकेत मानकर हंगामा करने लगे और डॉक्टरों के साथ हाथापाई तक की।

इस पूरे मामले में GMCH के अधीक्षक डॉ संजय कुमार ने कहा, “तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, मेडिकल प्रक्रिया के तहत शव लाया गया। परिजनों की घबराहट और अफवाहों ने स्थिति को बिगाड़ दिया। डॉक्टरों पर हमला निंदनीय है।” वहीं डॉ. विकास ने मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर बिना तथ्य के खबरें चलाने पर नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा, “कुछ यूट्यूबर सस्ती लोकप्रियता के लिए डॉक्टरों को बिना पुष्टि के दोषी ठहरा देते हैं। इससे हमारी छवि खराब होती है और जिन गरीबों का एकमात्र सहारा सरकारी स्वास्थ्य सेवा है, उनकी उम्मीदें भी टूटती हैं।”

अस्पताल प्रबंधन ने यह भी साफ किया कि डॉक्टरों की टीम ने पूरी जिम्मेदारी से काम किया और किसी भी लापरवाही का कोई प्रमाण नहीं है। उल्टा डॉक्टरों को भीड़ से बचने के लिए भागना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह बयान यूट्यूब चैनलों पर वायरल कर माहौल और अधिक बिगाड़ने की कोशिश की गई।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने चेताया है कि यदि डॉक्टरों को यूं ही साजिशों में घसीटा गया तो भविष्य में इमरजेंसी में कार्यरत चिकित्सकों का मनोबल टूटेगा, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान आम गरीब जनता को होगा। पुलिस प्रशासन ने डॉक्टरों पर हमले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सार्वजनिक अपील की गई है कि अगर डॉक्टर दोषी हैं तो निष्पक्ष जांच हो और कार्रवाई की जाए, लेकिन किसी भी अफवाह, राजनीतिक स्टंट या व्यूज के लालच में स्वास्थ्य तंत्र को बदनाम न किया जाए। गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल और डॉक्टर ही अंतिम सहारा होते हैं, उसे टूटने न दें।

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