SAHARSA NEWS, अजय कुमार : सहरसा के बंगाली बाज़ार ढाला पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर पिछले एक दशक से चल रहा आंदोलन आखिरकार रंग लाया है। टेंडर स्वीकृत होते ही सहरसा की जनता के बीच जश्न का माहौल है। इस आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले जन सुराज नेता सोहन झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिले के युवाओं और आमजनों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि पूरे जिले के सामूहिक संघर्ष का नतीजा है। झा ने याद दिलाया कि दस साल पहले जब उन्होंने जाम और अव्यवस्था से मुक्त शहर का सपना देखा, तब उन्होंने निजी जीवन से ज्यादा इस जनमुद्दे को महत्व दिया और धरना, प्रदर्शन, बाजार बंद, आमरण अनशन, पैदल मार्च, चक्का जाम से लेकर पटना और दिल्ली तक आवाज़ पहुँचाने का हर प्रयास किया। यहाँ तक कि जब निर्माण की प्रक्रिया को अटकाने की कोशिश हुई, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी और राज्य सरकार व मुख्यमंत्री तक सीधा दबाव बनाया।
सोहन झा ने कहा कि यह पुल सिर्फ़ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जनता की तकलीफ और वर्षों के त्याग का प्रतीक है। दशरथ मांझी ने जैसे पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था, उसी तरह उन्होंने व्यवस्था की दीवारों को तोड़ने का काम किया। आज जब टेंडर जारी हो चुका है, तो यह केवल एक ठेके की घोषणा नहीं, बल्कि उस संघर्ष की जीत है जिसे वर्षों तक दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी आख़िरी लड़ाई नहीं, बल्कि सहरसा के सर्वांगीण विकास की दिशा में यह एक पड़ाव भर है। जिले भर में लोग कह रहे हैं कि दशरथ मांझी ने पहाड़ हराया था और सोहन झा ने सिस्टम को जगाया है। आने वाले समय में यह ओवरब्रिज सिर्फ़ आवागमन को आसान नहीं करेगा, बल्कि यह “सोहन झा ब्रिज” के नाम से उस आंदोलन की जीवित मिसाल बन जाएगा, जिसने दिखाया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो एक व्यक्ति भी कारवां खड़ा कर सकता है।



