Purnia News: हासिये पर चलेे जा रहे बुजूर्गों को आज भी कई परिवार साये की तरह लगे रहते हैं सेवा-सत्कार में

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पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: Purnia News सामाजिक उथल-पुथल एवं बिगडती सामाजिक संस्कृति के बीच, अगर कोई सबसे ज्यादा परेशान समाज में बुजूर्ग ही हैं। खासकर गांवों में बुजूर्गों की हालत काफी दयनीय होती चली जा रही है। बढ़ते एकल परिवार के कारण बुजूर्गों के सेवा-सत्कार पर गहरा असर पड़ता चला जा रहा है तथा अधिकांश बुजूर्ग अपने को असहाय महसूस कर रहे हैं। अब बहुत ही कम ऐसे परिवार हैं, जहां बुजूर्गों की देखभाल एक नन्हें बालक की तरह किया जा रहा हो।

यद्यपि जिस परिवार में शिष्टता, अनुशासन एवं संस्कार हैं, वहां आजभी बुजूर्गों का देखभाल नन्हें बच्चों की तरह करते हुए देखा जा सकता है। ऐसे ही परिवार में एक परिवार गायत्रीनगर तेलडीहा के 92 वर्षीय बुजूर्ग छेदी जायसवाल का देखा जा सकता है। एक पुत्र के परिवार में तीन-तीन शादीशुदा पौत्रों, छोटे-छोटे परपौत्रों के बीच, इस परिवार में कभी भी किसी ने तनाव नहीं देखा। सभी परिवार एक-दूसरे के लिए समर्पण की भावना पूरे परिवार की बगिया को खुशबू से भर देता है। उनका पुत्र, पौत्र, घर की महिलाएं जिस प्रकार उनके साथ साये की तरह रहते हैं, लोग सोचते हैं कि काष, उनका भी परिवार भी ऐसा ही होता।

आज यह परिवार अपने संस्कार, शिश्टाचार एवं अनुशासन की नजीर बना हुआ है। प्रायः सभी बुजूर्ग इनको देखकर यही कहते नजर आते हैं कि काश, उनका भी परिवार ऐसा होता। मौके पर बुजूर्ग छेदी जायसवाल ने कहा कि अभी के समय में वे खुशकिश्मत हैं तथा उनके परवरिश का फल है कि वे आज इस अंतिम अवस्था में भी शांति की जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने बुजूर्गों का जरूर खयाल रखें, वे उनकी थाती हैं, जो हमेशा उनके लिए ही सोचते हैं।

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