पूर्णिया : शहर के प्रतिष्ठित कला भवन, स्टेट बैंक रोड में 24 नवंबर 2025 की संध्या सात बजे से शुरू हुआ भव्य विवाह समारोह पूर्णिया के सामाजिक परिदृश्य में एक यादगार अध्याय बन गया, जब भट्ठा बाजार की सुपरिचित चौहान व सिंह परिवार की सुपौत्री आयुष्मती श्वेता चौहान का विवाह दुर्गा बाड़ी निवासी विजय कुमार सिंह व श्रीमती अनामिका सिंह के सुपौत्र आयुष्मान अमन कुमार के साथ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत 21 नवंबर को श्री सत्यनारायण भगवान की कथा एवं मटकोर से हुई, जिसमें परिवार की महिलाओं ने परम्परागत गीत गाते हुए मिट्टी की हांड़ी में मिट्टी भरी और घर-आंगन को पवित्र किया। दूसरे दिन 22 नवंबर को कुलदेवता पूजन के साथ ही छोटे भाई-बहनों का मुंडन संस्कार हुआ, जिसमें दादी कमला देवी व नानी सुभद्रा देवी की आँखें आशीर्वाद देते-देते नम हो गईं। 23 नवंबर की शाम हल्दी-मेहंदी की रंगारंग महफिल सजी जिसमें नाच-गाना, ठुमके और हंसी-ठिठोली का दौर देर रात तक चलता रहा। मुख्य विवाह 24 नवंबर को हुआ।
कला भवन को फूलों, लाइट्स और रंग-बिरंगी सजावट से इस कदर सजाया गया था कि लग रहा था मानो कोई स्वर्ग का द्वार खुल गया हो। वर अमन कुमार दूल्हे के भव्य शेरवानी में और वधू श्वेता लाल-सुनहरी लहंगे में इतनी सुंदर लग रही थीं कि हर आने वाला मेहमान एक पल को ठिठक कर बस देखता रह गया। जयमाला के बाद कन्यादान के समय पिता नंदकिशोर सिंह व माता रंजना सिंह की आँखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली, जबकि दादी कमला देवी ने रोते-रोते पोती को जीवन भर सुखी रहने का आशीर्वाद दिया। फेरों के बाद विदाई का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। श्वेता ने रोते हुए दादी-नानी, माता-पिता और छोटे भाई-बहनों को गले लगाया और ससुराल के लिए प्रस्थान किया। विदाई के समय छोटे बच्चों ने बड़े मासूम अंदाज में गीत गाया – “मेली मौछी की छादी में जलुल छे जलुल आजा… ब्रेसी” जिसे सुनकर पूरा पंडाल भाव-विभोर हो गया। समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ दूर-दराज से आए रिश्तेदारों ने श्वेता-अमन के जोड़े को आशीर्वाद दिया। प्रीतिभोज में मिथिला, अंगिका और राजस्थानी व्यंजनों की भरमार थी और मेहमानों ने भरपेट स्वाद चखा। नव दंपति ने सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और भाई-बहनों का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। अब ये दोनों नई जिंदगी, नए सपनों और नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ेंगे। पूर्णिया के इस भव्य विवाह ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि सीमांचल की धरती पर रिश्तों की मिठास और परंपराओं का सम्मान आज भी बरकरार है।

