SRP डिग्री कॉलेज, डगरूआ में तृतीय सेमेस्टर नामांकन पर अवैध वसूली का आरोप — बिना रसीद ₹500 लेने से छात्रों में रोष, वायरल ऑडियो ने बढ़ाई चिंता

पूर्णिया, किशन : पूर्णिया विश्वविद्यालय से संबद्ध SRP डिग्री कॉलेज, डगरूआ में स्नातक तृतीय सेमेस्टर नामांकन प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि नामांकन फॉर्म के नाम पर प्रति छात्र ₹500 की अवैध वसूली की जा रही है। सबसे गंभीर बात यह कि यह राशि बिना किसी आधिकारिक रसीद, बिना नोटिस और बिना विश्वविद्यालय के आदेश के ली जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला तब सुर्खियों में आया जब इस कथित अवैध वसूली से जुड़ा एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर कॉलेज से जुड़े एक व्यक्ति को छात्रों से “नियम” के नाम पर निर्धारित राशि लेने की बात करते सुना जा सकता है। हालांकि ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसके वायरल होते ही छात्रों और अभिभावकों में गहरी नाराज़गी और अविश्वास फैल गया है।

छात्रों का कहना है कि रसीद मांगने पर उन्हें टालने की कोशिश की गई और कई मामलों में दबाव का वातावरण महसूस कराया गया। बिना रसीद वसूली की यह प्रक्रिया न केवल अनैतिक है, बल्कि कॉलेज प्रशासन की नीतियों और जिम्मेदारियों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाती है। छात्र संगठनों ने इसे स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता बताते हुए जांच की मांग उठाई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि — क्या विश्वविद्यालय प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या यह सब उनकी जानकारी में होते हुए भी हो रहा है? विश्वविद्यालय की चुप्पी से संदेह और गहरा हो गया है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बार-बार ऐसे आरोप उठना प्रशासनिक ढिलाई और निगरानी के अभाव को उजागर करता है।

इस मामले को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि विश्वविद्यालय तत्काल संज्ञान लेकर स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराए। वायरल ऑडियो की फोरेंसिक जांच, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए रसीद आधारित प्रणाली और कड़े दिशा-निर्देश लागू किए जाने की मांग भी उठ रही है। समग्र रूप से, SRP डिग्री कॉलेज में इस तरह की घटनाएँ न केवल छात्रों के अधिकारों को प्रभावित करती हैं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन से उम्मीद है कि वह त्वरित कदम उठाकर इस अविश्वास को दूर करेगा और छात्रों को निष्पक्ष नामांकन प्रक्रिया का भरोसा दिलाएगा।

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