मोहनपुर एपीएचसी कुव्यवस्था का शिकार

मोहनपुर एपीएचसी कुव्यवस्था का शिकार, नहीं चलता है जेनरेटर
प्रसव के अवशेषों को खुले में रखा एवं जलाया जाता है, जहां कुत्तों का बसेरा है
बेड पर चादर नहीं, इस भीशण ठंड में रोगियों के लिए प्रयाप्त कंबल नहीं, सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है
पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है, शौचालय भी गंदा पडा रहता है

अंग इंडिया संवाददाता/रुपौली/

मोहनपुर एपीएचसी कुव्यवस्था का षिकार हो गया है, जिसे देखनेवाला कोई नजर नहीं आ रहा है । जहां एक नजर देखने के बाद लगता ही नहीं है कि वहां कोई अस्पताल भी है । जबकि इस अस्पताल पर पांच पंचायतों के लगभग पचास हजार लोगों के स्वास्थ्य रक्षा की जिम्मेदारी है । जब इस अस्पताल में प्रसव कराने जंगलटोला की महिला पहुंचीं, तब यहां कोई लाइट नहीं जल रही थी, जेनरेटर बंद था ।

पूछने पर ड्यूटी पर तैनात एएनएम राखी कुमारी, मीरा कुमारी ने एक बल्ब जलाते हुए बताया कि यहां के जेनरेटर या आउट सोर्सिंग का जिम्मा ठीकेदार सिंटू कुमार के जिम्मे है । उसका कोई आदमी नहीं रहता है । एक इनवर्टर लगाया गया है, जिसे ठीकेदार के आदमी के अभाव में वह ही जलाती-बुझाती हैं । जब जरूरत होती है, तब एकाध बल्ब जला दिया जाता है, जेनरेटर नहीं चलता है । ठीक इसी तरह रोगी कक्ष अंधेरा था, जहां बेड पर चादर नहीं बिछे थे, सबकुछ अस्त-व्यस्त दिखा । कंबल के बारे में जब एएनएम से पूछा गया, तब वह कुछ भी बताने से इनकार किया । सिर्फ एक कंबल बेड पर दिखा, इसके अलावा कहीं भी कंबल नहीं दिखा । शौचालय का फ्लस गायब था तथा गंदगी थी । पानी के नाम पर बस एक नल था । अस्पताल के आगे का चापाकल पता नहीं कब से खराब पडा हुआ है । अपंग रोगी के लिए कुर्सी इस कदर गंदी थी कि शादय ही कोई उसपर बैठ पाए । सबसे बडा आश्चर्य यह कि प्रसव के बाद के वेस्ट पदार्थों के अवशेष को वहां से हटाने या ले जाने की कोई सुविधा नहीं देखी गई । एएनएम ने बताया कि उन अवशेषों को बाहर सिमेंट के बने चैकोर चबूतरा पर अवशेष को प्रतिदिन शाम को जला दिया जाता है । यद्यपि उस स्थान पर कुत्ता बैठा हुआ था, जिससे प्रतीत हो रहा था कि कुत्ते उन अवशेशों को खा जाते होंगे । आश्चर्य तो यह भी लगा कि जंगलटोला से प्रसव के लिए आयी महिला को प्रसव कक्ष में ले जाया गया, जहां काफी कम रोशनी थी, जबकि उस कक्ष में प्रयाप्त रोशनी रहनी चाहिए । कुल मिलाकर इस अस्पताल की हालत काफी दयनीय है, इसे कोई देखनेवाला नहीं है । बस ऐसा लगता है कि कागज पर ही अस्पताल चल रहा है । जेनरेटर सहित आउट सोर्सिंग बहाली के नाम पर बस खानापूर्ति की जा रही है । देखें इस अस्पताल की दशा कबतक सुधरती है ।

बिजली जाते ही जेनरेटर को स्टार्ट कर देना है । अगर जेनरेटर नहीं चलने के साथ-साथ अस्तपाल कुव्यवस्था का शिकार है, तब इसकी जांच कर, कार्रवायी करेंगे ।

डाॅ नीरज कुमार, चिकित्सा प्रभारी, रूपौली प्रखंड

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