पूर्णिया के साहित्यिक गौरव ‘द्विज’ को नमन, 122वीं जयंती पर गूंजा सम्मान और विमर्श

अंग इंडिया संवाददाता, पूर्णिया/

पूर्णिया कॉलेज के प्रथम प्राचार्य और प्रख्यात साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ की 122वीं जयंती शहर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर के कलाभवन स्थित साहित्य विभाग में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रथम लोकपाल डॉ. शिवमुनि यादव ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कलाभवन के उपाध्यक्ष डॉ. देवी राम तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रियव्रत नारायण सिंह, पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर पंकज, पूर्णिया कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. शंभू लाल वर्मा ‘कुशाग्र’, महिला कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. उषा शरण, प्रोफेसर विजया रानी, कला भवन साहित्य विभाग की संयोजिका, कथाकार एवं द्विज जी की नतिनी डॉ. निरुपमा राय मंचासीन रहीं। कार्यक्रम का संचालन बबिता चौधरी ने किया।

सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज को श्रद्धांजलि दी। प्रथम सत्र में वक्ताओं ने द्विज जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. निरुपमा राय ने कहा कि द्विज जी नियमप्रिय, प्रखर वक्ता और उद्भट साहित्यकार थे। उन्होंने मांग की कि उनकी रचनाओं को मैट्रिक स्तर तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन, साहित्य के प्रति रुचि और स्थानीय साहित्यकारों को जानने-समझने की प्रवृत्ति विकसित हो।

साहित्यकार डॉ. निशा प्रकाश ने द्विज जी को पूर्णिया की धरती का कालजयी कवि बताते हुए कहा कि आज के युवा देश-विदेश के कवियों को तो जानते हैं, लेकिन अपने ही जिले के साहित्यकारों से अनजान हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने स्कूल-कॉलेज स्तर पर ऐसे प्रयासों की आवश्यकता बताई।

कलाभवन के उपाध्यक्ष डॉ. देवी राम ने कहा कि द्विज जी ने अपने साहित्य के माध्यम से पूर्णिया का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। वहीं पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर पंकज ने कहा कि द्विज जी छायावाद युग के भावुक कवि, कहानीकार, आलोचक और अनुशासनप्रिय शिक्षाविद थे। वे 1948 से 1964 तक पूर्णिया कॉलेज के प्राचार्य रहे। उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में अनुभूति और अंतर्ध्वनि तथा कहानी संग्रहों में किसलय, मालिका, मधुमयी और मृदुदल शामिल हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के बाहर कई राज्यों में द्विज जी की रचनाएं पाठ्यक्रम में शामिल हैं, लेकिन बिहार में अब तक ऐसा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

इस अवसर पर द्विज जी की दौहित्री शल्या झा, विजय श्रीवास्तव, डॉ. के.के. चौधरी, यमुना प्रसाद बसाक, डॉ. किशोर कुमार यादव, गिरीश कुमार सिंह, मीणा सिंह, डॉ. ज्ञान कुमारी राय, सरिता झा, शौर्य राय, रीना सिंह, दिव्या त्रिवेदी, वंदना कुमारी, हरे कृष्ण प्रकाश, सुनील समदर्शी, रंजीत तिवारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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