एग्जाम से पहले ही क्रैश हुआ सिस्टम: पूर्णिया विश्वविद्यालय की लापरवाही बेनकाब

पूर्णियाँ, संवाददाता: पूर्णियाँ विश्वविद्यालय द्वारा बड़े दावे के साथ जारी किया गया परीक्षा कैलेंडर 2025-26 अब सवालों के घेरे में है। कैलेंडर के अनुसार यूजी सेमेस्टर–1 (दिसंबर 2025), सत्र 2025-29 की परीक्षा 3 फरवरी 2026 से 14 फरवरी 2026 तक आयोजित होनी थी। लेकिन निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी न तो परीक्षा शुरू हो सकी और न ही परीक्षा फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार यह परीक्षा कैलेंडर सीनेट बैठक से ठीक पहले जारी किया गया था। अब जब कैलेंडर में दर्ज पहली ही परीक्षा समय पर आयोजित नहीं हो सकी, तो विश्वविद्यालय की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि बिना ठोस तैयारी के केवल औपचारिकता निभाने के लिए तिथियों की घोषणा कर दी गई।

फॉर्म नहीं, तैयारी नहीं, फिर भी तिथि घोषित
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परीक्षा आयोजन को लेकर जमीनी स्तर पर कोई ठोस तैयारी नहीं की गई थी। परीक्षा फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हुई, जबकि परीक्षा की तिथि घोषित कर दी गई थी। परीक्षा केंद्र निर्धारण, प्रश्नपत्र छपाई और गोपनीय व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता का अभाव बताया जा रहा है। छात्रों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। एक छात्र ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा, “हम लोग महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अचानक परीक्षा नहीं हुई और कोई आधिकारिक सूचना भी जारी नहीं की गई। इससे मानसिक तनाव बढ़ गया है।”

एक अन्य छात्र ने कहा,
“अगर परीक्षा लेने की तैयारी नहीं थी तो कैलेंडर क्यों जारी किया गया? यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”

 

कुलपति से संपर्क नहीं, जवाबदेही पर प्रश्न
मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जब कुलपति से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो न तो कॉल रिसीव की गई और न ही कॉल बैक किया गया। परीक्षा विभाग के अधिकारियों से भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। प्रशासन की इस चुप्पी ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। शिक्षाविदों का मानना है कि परीक्षा कैलेंडर किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साख का आधार होता है। यदि घोषित कार्यक्रम का पालन नहीं हो पाता और जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बचते हैं, तो यह संस्थागत विश्वसनीयता पर सीधा आघात है।

नई तिथि कब होगी घोषित?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द हुई परीक्षा की नई तिथि कब घोषित की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से अभी तक संशोधित कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि —
जल्द से जल्द परीक्षा फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। संशोधित परीक्षा तिथि और कार्यक्रम सार्वजनिक किया जाए। देरी के कारणों की आधिकारिक जानकारी दी जाए। यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो छात्र संगठनों द्वारा कुलपति का घेराव की चेतावनी भी दी जा रही है।

छात्रों का भविष्य अँधेरे में
परीक्षा में देरी से न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया—जैसे अगला सेमेस्टर, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नामांकन—भी प्रभावित होने की आशंका है। अभिभावकों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। फिलहाल पूर्णिया विश्वविद्यालय की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और नई परीक्षा तिथि कब तक घोषित की जाती है। छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं।

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