पूर्णिया, संवाददाता : पूर्णिया विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के दौरान बुधवार को उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब छात्र नेताओं के एक समूह ने कार्यक्रम में छात्रों को आमंत्रित न किए जाने को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक, अधिकारी और कई गणमान्य लोग मौजूद थे, लेकिन छात्रों की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों ने पूरे आयोजन की गरिमा पर असर डाल दिया।
जानकारी के अनुसार, विवाद की पृष्ठभूमि दिन में ही तैयार हो चुकी थी। कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सका, क्योंकि कुलपति की पटना में अदालत में पेशी थी। उनके वापस पूर्णिया लौटने के बाद शाम में कार्यक्रम की शुरुआत की गई। समय में इस बदलाव से पहले ही असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे लेकर असंतोष भी पनप रहा था।
इसी बीच, जैसे ही कार्यक्रम आगे बढ़ा, कुछ छात्र नेताओं ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझकर छात्रों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रण सूची से बाहर रखा, जो सीधे तौर पर छात्रों की उपेक्षा को दर्शाता है। देखते ही देखते माहौल शोर-शराबे और अफरा-तफरी में बदल गया, जिससे कार्यक्रम कुछ समय के लिए बाधित हो गया।
स्थिति को गंभीर होते देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में आए। कार्यक्रम में मौजूद अन्य प्रतिभागियों ने विरोध कर रहे छात्र नेताओं से शांति बनाए रखने और कार्यक्रम को जारी रखने का आग्रह किया। इस दौरान एक भावनात्मक अपील भी सामने आई, जिसमें एक प्रतिभागी ने कहा कि “कम से कम एक बहन को कार्यक्रम करने दिया जाए।” इस मानवीय अपील का असर हुआ और छात्र नेताओं ने शांतिपूर्वक कार्यक्रम स्थल से हटने का निर्णय लिया, जिसके बाद आयोजन पुनः शुरू हो सका। प्रशासन की तत्परता से किसी बड़ी अप्रिय घटना को टाल दिया गया।

इस दौरान एक और संवेदनशील स्थिति तब उत्पन्न हुई, जब कुछ छात्र नेताओं और कुलपति के बीच तीखी बहस हो गई। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब एक छात्र नेता ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की चेतावनी दे दी। जवाब में कुलपति ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साथ चलने और दोनों आग लगाएंगे और पहले खुद आग लगाने की बात कही। हालांकि, मौजूद लोगों और प्रशासन की सूझबूझ से स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति विवेकानंद सिंह ने अनुशासन बनाए रखने पर जोर देते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्यक्रम में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत रखा जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से हंगामा करके।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के समय में किए गए बदलाव से कुछ आमंत्रित लोगों को भी असुविधा हुई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने का प्रयास जारी रखा।
दिनभर के विवाद और तनाव के बाद आखिरकार शाम में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित शिक्षकों और छात्रों ने विश्वविद्यालय की उन्नति के लिए अपनी शुभकामनाएं भी व्यक्त कीं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच संवादहीनता को उजागर कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विवाद से क्या सबक लेता है और भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए किस तरह के ठोस कदम उठाए जाते हैं।




