पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र, तिथि, शिफ्टिंग का खेल — छात्र कब तक झेलेंगे यह अव्यवस्था

पूर्णिया : पूर्णिया विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर अव्यवस्था के आरोपों में घिर गई है। ताज़ा अधिसूचना में सीबीसीएस स्नातक प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर (दिसंबर 2025) के अंतर्गत बायसी के Sub-Divisional Govt. Degree College के भूगोल विषय की प्रायोगिक परीक्षा का केंद्र R.K.S.M. कॉलेज, किशनगंज से बदलकर M.L. Arya कॉलेज, कसबा कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह बदलाव उसी दिन शाम में घोषित किया गया, जिस दिन यानी 20 मई से 27 मई के बीच यह प्रायोगिक परीक्षा निर्धारित थी। सुबह तक छात्र एक केंद्र के अनुसार तैयारी करते रहे, और शाम को उन्हें नए केंद्र की सूचना मिल गई।

इस निर्णय ने छात्रों को असमंजस और परेशानी में डाल दिया है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले कई छात्रों ने यात्रा, समय और ठहरने की व्यवस्था पहले से कर रखी थी। अंतिम समय में केंद्र बदलने से उनकी योजना, खर्च और मानसिक संतुलन पर सीधा असर पड़ा है।

मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि पूर्व में R.K.S.M. कॉलेज, किशनगंज में प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान कथित पैसे की उगाही का वीडियो वायरल हो चुका है। ऐसे आरोपों के बाद भी वहां परीक्षा केंद्र निर्धारित किया जाना, और फिर अंतिम समय में बदल देना—दोनों ही विश्वविद्यालय की तैयारी और जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं। यदि शिकायतों की जानकारी थी तो पहले जांच क्यों नहीं हुई, और यदि जानकारी नहीं थी तो यह प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है।

यह पहली बार नहीं है जब छात्र इस तरह की अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं। इससे पहले स्नातक सत्र 2025–29 प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान भी केंद्र परिवर्तन, तिथि परिवर्तन और शिफ्टिंग की समस्या के कारण परीक्षा स्थगित करनी पड़ी थी। अब उन्हीं छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा में फिर से केंद्र बदल दिया गया है।

छात्र जदयू नेता प्रियांशु सिंह और आनंद कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रबंधन पूरी तरह असंगठित दिखाई देता है। छात्रों की तैयारी, समय और आर्थिक स्थिति की कोई परवाह नहीं की जा रही। बार-बार केंद्र और तिथि बदलना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा से जुड़े निर्णय पूर्व-योजना और पारदर्शिता के साथ लिए जाएं, ताकि छात्रों को बार-बार अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

छात्रों और अभिभावकों के बीच अब यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर पूर्णिया विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी कौन लेगा? परीक्षा केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है। यदि इसी तरह अंतिम समय में फैसले होते रहे, तो “अधिसूचना” छात्रों के लिए राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी का संकेत बनती रहेगी।

परीक्षा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है। अधिसूचना का अर्थ स्पष्टता और सुविधा होना चाहिए, न कि असमंजस और अव्यवस्था। अब सवाल यह है कि विश्वविद्यालय इस स्थिति से क्या सबक लेता है, ताकि आगे अधिसूचनाएँ छात्रों के लिए सचमुच ‘वरदान’ साबित हों, ‘श्राप’ नहीं।