पूर्णिया : पूर्णिया विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PAT) 2024 और 2025 को लेकर छात्रों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। महीनों से परीक्षा तिथि की प्रतीक्षा कर रहे शोधार्थियों का गुस्सा बुधवार को खुलकर सामने आया, जब छात्रों का एक शिष्टमंडल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक से मिला और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए अविलंब परीक्षा आयोजित कराने की मांग की। छात्रों का कहना है कि यह देरी अब साधारण प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ बन चुकी है।
शोधार्थी रवि गुप्ता ने तीखे शब्दों में कहा कि PAT 2024 का आवेदन PAT 2023 के साथ ही लिया गया था। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी परीक्षा आयोजित नहीं होना विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर छात्रों से समय पर आवेदन शुल्क लेने में तत्पर रहने वाला प्रशासन परीक्षा कराने में इतना असहाय क्यों हो जाता है? क्या शोधार्थियों का समय और करियर विश्वविद्यालय की प्राथमिकता में शामिल नहीं है?
छात्रों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में PAT 2024 के लिए 189 सीटों पर आवेदन लिया गया, लेकिन परीक्षा की कोई ठोस तैयारी नहीं हुई। जब छात्रों ने आवाज उठाई तो पुनः आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई और सीटों की संख्या घटाकर मात्र 38 कर दी गई। क्या यह पारदर्शिता है या फिर प्रशासनिक मनमानी? छात्रों के विरोध के बाद सीटें बढ़ाकर 104 कर दी गईं, लेकिन परीक्षा आज तक नहीं हुई। आखिर सीटों के इस खेल के पीछे क्या मंशा है? क्या विश्वविद्यालय स्वयं अपनी घोषणाओं पर गंभीर नहीं है?
छात्र नेता नीतीश कुमार पासवान ने कहा कि पीएचडी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में लगातार हो रही देरी से उच्च शिक्षा और शोध कार्यों की गति पूरी तरह प्रभावित हो रही है। विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने पहले आश्वासन दिया था कि PAT 2024 और 2025 की परीक्षा संयुक्त रूप से जल्द कराई जाएगी, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है, कार्रवाई नहीं। क्या छात्रों को सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिलती रहेगी?
छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र परीक्षा तिथि घोषित नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के भविष्य, शोध कार्यों की निरंतरता और शैक्षणिक सत्र की गंभीरता को समझना चाहिए। बार-बार आवेदन, सीटों में बदलाव और परीक्षा में अनिश्चितता ने छात्रों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से परेशान कर दिया है।
इस दौरान चंदन कुमार, डीएम कुमार, कुंदन कुमार नंदन, विकास कुमार, विकास कुमार नंदन सहित कई शोधार्थी मौजूद रहे। छात्रों ने एक स्वर में कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, परीक्षा की निश्चित तिथि चाहिए।








