नई दिल्ली/कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सांसद काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का फैसला किया है और केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद बागी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला और संसद में उन्हें अलग समूह के रूप में बैठने की व्यवस्था करने की मांग की। काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया कि उनके साथ TMC के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं और उन्होंने इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज भी लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिए हैं।
काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि उनका उद्देश्य बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना है। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उन्होंने NDA के साथ सहयोग करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने सीधे BJP में शामिल होने के बजाय NCPI के माध्यम से अपनी नई राजनीतिक राह चुनी है। गौरतलब है कि TMC के भीतर पिछले कुछ समय से नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। काकोली घोष दस्तिदार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से हटाए जाने के बाद मतभेद और गहरे हो गए थे। इसके बाद कई सांसद उनके साथ आ गए और पार्टी के अंदर एक अलग गुट उभरकर सामने आया।
वहीं, TMC नेतृत्व ने इस कदम का विरोध किया है और इसे पार्टी के जनादेश के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी और संसदीय कार्रवाई की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि संसद के आगामी सत्र में राजनीतिक समीकरणों को भी बदलने के संकेत दे दिए हैं।
